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    Home»Jharkhand Top News»स्वदेशी अपनाना सिर्फ वस्तुओं का चयन नहीं, देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है: राज्यपाल
    Jharkhand Top News

    स्वदेशी अपनाना सिर्फ वस्तुओं का चयन नहीं, देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है: राज्यपाल

    shivam kumarBy shivam kumarOctober 12, 2025No Comments3 Mins Read
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    -स्वदेशी मैराथन में दौड़ी रांची, युवाओं ने दिया ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संदेश
    रांची। रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को जोश, उमंग और देशभक्ति से सराबोर नजर आया। यहां स्वदेशी मैराथन-2025 का आयोजन किया गया, जिसका थीम ‘स्वदेशी अपनाओ,आत्मनिर्भर भारत बनाओ’ था। इस आयोजन में हजारों युवक-युवतियों, स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों सहित आम लोगों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया। इस दौरान पूरा मोहराबादी मैदीन ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंज उठा। युवाओं ने मैराथन में दौड़कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संदेश दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्र चेतना, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी भावना का प्रतीक है। इस जन-जागरूकता अभियान के आयोजन के लिए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को हार्दिक बधाई तथा सभी प्रतिभागियों को अनंत शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि “हर घर स्वदेशी” का यह आह्वान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस विचार को आत्मसात करने का संदेश देता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वदेशी अपनाना केवल वस्तु का चयन नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

    राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर देशवासियों से “वोकल फॉर लोकल” का आह्वान करते हैं। उनका यह संदेश है कि जब हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं, तो हम केवल किसी उत्पाद का नहीं, बल्कि अपने देश के श्रम, कौशल और सम्मान का समर्थन करते हैं। उन्होंने नागरिकों से “वोकल फॉर लोकल” के संदेश को जीवन का हिस्सा बनाने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वदेशी अपनाना है और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, यही ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग है।” यह मैराथन भी उसी भावना का जीवंत प्रतीक है, जहां हर कदम स्वदेशी, स्वास्थ्य और स्वाभिमान की दिशा में बढ़ रहा है। उन्हें यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि यहां के लोग इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से स्वदेशी अपनाने, स्वावलंबी बनने तथा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस अवसर पर कहा कि आज का युवा भारत के भविष्य की रीढ़ है, यदि वह स्वदेशी उत्पादों का उपयोग और प्रचार करेगा, तो 2047 तक “विकसित भारत” का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकेगा। रांची में आयोजित यह मैराथन केवल दौड़ नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक जन आंदोलन की शुरुआत है।

    इस अवसर पर कारगिल युद्ध में शामिल रहे कर्नल राणा भी विशेष रूप से दिल्ली से रांची पहुंचे। उन्होंने कहा कि भारत के विकास और आत्मनिर्भरता की राह में देश का हर नागरिक एक सैनिक है, जो स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आर्थिक सुरक्षा में योगदान दे सकता है।

    आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि जन जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जो युवाओं में आत्मनिर्भरता की भावना जगाने के उद्देश्य से देशभर में आयोजित किया जा रहा है।

    लगभग 5 किलोमीटर लंबी इस स्वदेशी मैराथन में सुबह से ही युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई प्रतिभागियों ने तिरंगा लेकर दौड़ लगाई, तो कईयों ने स्वदेशी संदेश वाले बैनर और पोस्टर थाम रखे थे। दौड़ में युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मैराथन मोरहाबादी मैदान से शुरू होकर कांटाटोली चौराहा होते हुए वापस मोरहाबादी तक पहुंची। यह मैराथन पूरे रास्ते उत्साह, संगीत और देशभक्ति के रंग में डूबी रही। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

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    shivam kumar

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