इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने अब महामारी का रूप ले लिया है। शुक्रवार को इलाज के दौरान एक और बुजुर्ग की मौत के साथ ही इस जल संकट से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 26 तक पहुँच गया है। शहर में लगातार होती मौतों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
इलाज के दौरान तोड़ा दम ताजा मामला 63 वर्षीय बद्री प्रसाद का है, जिन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद 17 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अनुसार, बद्री प्रसाद पहले से टीबी की बीमारी से जूझ रहे थे, और दूषित पानी के संक्रमण ने उनकी स्थिति को और बिगाड़ दिया। फिलहाल अस्पताल में 10 अन्य मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से एक की हालत नाजुक है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।
अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के मुताबिक, दूषित पानी से प्रभावित कई मरीज शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से अधिकांश मरीज पहले से ही किडनी, लिवर या सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं, जिसके कारण संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है। बॉम्बे अस्पताल और अपोलो अस्पताल में भी कई बुजुर्ग ‘मल्टी ऑर्गन फेल्योर’ और संक्रमण के कारण जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और टैंकरों से सप्लाई बढ़ते मौत के आंकड़ों के बीच नगर निगम और जिला प्रशासन ने भागीरथपुरा में पाइपलाइन सुधार कार्य तेज कर दिया है। वर्तमान में क्षेत्र के 30 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू की गई है। शेष 70 प्रतिशत इलाकों में पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है, जिसे इसी माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।
जनता के बीच अविश्वास का आलम यह है कि लोग अब भी नलों के पानी का उपयोग करने से कतरा रहे हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन रोजाना 50 से अधिक टैंकरों के जरिए घर-घर शुद्ध पानी पहुँचाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का दावा है कि सप्लाई से पहले पानी की लैब में नियमित जांच की जा रही है, ताकि संक्रमण की पुनरावृत्ति न हो।

