काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की संसद से लगातार अनुपस्थिति अब राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई है। विपक्षी दलों के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं। अब 29 मई को पेश होने वाले वार्षिक बजट सत्र में उनकी उपस्थिति को लेकर भी संशय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह बजट अधिवेशन शुरू होने के बाद से अब तक संसद की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने न तो सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर हुई चर्चा में भाग लिया और न ही सांसदों के सवालों का जवाब दिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण और सरकार की नीति एवं कार्यक्रम प्रस्तुति के दौरान भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
प्रधानमंत्री की मीडिया सलाहकार दीपा दहाल ने कहा कि बजट भाषण के दौरान उनकी उपस्थिति को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है, लेकिन फिलहाल उनके कार्यक्रम में संसद में उपस्थित रहने का उल्लेख नहीं है।
उधर, प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष डीपी आर्यल भी आलोचना के घेरे में हैं। विपक्षी नेताओं और संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए अध्यक्ष को ठोस कदम उठाने चाहिए थे। विशेषज्ञ हरि बहादुर थापा ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद के प्रति जवाबदेह बनाना अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी होती है।
सूत्रों के मुताबिक, सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय संसद भवन से बेहद करीब होने के बावजूद शाह काम के दबाव का हवाला देकर सदन में नहीं पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह कार्यालय से ही संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखते हैं।

