दो-तीन महीने में मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन रेल आंदोलन की चेतावनी
।।रवि कुमार गुप्ता बरवाडीह प्रतिनिधि।।
बरवाडीह। केचकी रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव और यात्री सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर रविवार को एक्सप्रेस ठहराव संघर्ष समिति ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। धरना समाप्त होने के बाद समिति ने स्टेशन मास्टर को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा और उसे धनबाद रेल मंडल के डीआरएम तक पहुंचाने का आग्रह किया।
पर्यटन स्थलों के कारण महत्वपूर्ण है केचकी स्टेशन
धरना को संबोधित करते हुए झारखंड आंदोलनकारी अलीहसन अंसारी ने कहा कि केचकी रेलवे स्टेशन के आसपास बेतला नेशनल पार्क, पलामू किला, मिरचैया फॉल और केचकी संगम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल स्थित हैं। इसके बावजूद स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से पर्यटकों के साथ-साथ विद्यार्थियों, व्यापारियों और आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव शुरू होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा
एक्सप्रेस ठहराव संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन के समक्ष पांच सूत्री मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से रांची-सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस का केचकी स्टेशन पर दोनों दिशाओं में ठहराव सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण, कंचनपुर गांव और ओरंगा नदी गेट के पास अंडरपास बनाने तथा पीसीसी सड़क का निर्माण कराने की मांग की गई। समिति ने कहा कि इन सुविधाओं के विकसित होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना-प्रदर्शन में सांसद प्रतिनिधि ईश्वरी सिंह, केचकी मुखिया बुधेश्वर सिंह, फौजदार सिंह और सलाम अंसारी सहित कई लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द कार्रवाई करने की अपील की।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि अगले दो से तीन महीने में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन रेल परिचालन ठप करने के लिए आंदोलन शुरू करने की बात भी कही गई।
अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन समिति की मांगों पर क्या कदम उठाता है और केचकी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर कब तक निर्णय लिया जाता है।

