रामगढ़। झारखंड मुक्ति मोर्चा रामगढ़ जिला इकाई द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 25 फरवरी को छत्तर मांडू स्थित समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके उपरांत राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपायुक्त रामगढ़ को सौंपा गया। धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए झामुमो के वरिष्ठ नेता सह जिला अध्यक्ष विनोद किस्कू ने कहा कि वर्षों से वन भूमि में रहनेवाले आदिवासी एवं मूलवासी जंगल में रहकर अपना जीवन यापन करते आ रहे हैं। इसी के तहत केंद्र सरकार द्वारा वन अधिकार अधिनियम 2006 में वन अधिकार पट्टा दिया गया था। जिसमें आदिवासी एवं मूलवासी जंगल में रहकर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।
लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण हजारों वर्षों से जंगलों में निवास कर भरण पोषण करने वाले आदिवासी एवं मूलवासी परिवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 13 फरवरी को लाखों लोगों को जंगल से हटने हटाने का फैसला सुनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के तरफ से कोई प्रतिनिधि अपना पक्ष नहीं रखा। उन्होंने कहा कि इस विषय बिंदु पर राज्य एवं केंद्र सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए था। जिसके कारण 20 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वन पट्टा अधिनियम 2006 करने के इस निर्णय को सख्ती से प्रभाव में किये जाने हेतु राज्य प्रशासन को निर्देशित किया गया है। झामुमो ने राष्ट्रपति से मांग किया है कि रद वन पट्टा अधिनियम निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने हेतु केंद्र सरकार को निर्देशित किया जाये। ताकि मूलवासी एवं आदिवासी का अस्तित्व बचा रहे। उनका हक अधिकार बना रहे।