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    Home»Top Story»टंडवा में अधिकारियों ने सरकारी जमीन को बेचा
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    टंडवा में अधिकारियों ने सरकारी जमीन को बेचा

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskOctober 19, 2019No Comments3 Mins Read
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    रांची। टंडवा की मगध और आम्रपाली सीसीएल परियोजना में अब एक नया घोटाला सामने आया है। सीसीएल की दो कोल खदानें जिस भूमि पर हंै, उसमें से अधिकांश भूमि सरकार की थी। वन भूमि, गैरमजरुआ आम और खास किस्म की थीं। इस नेचर की जमीन को टंडवा में पदस्थापित अंचलाधिकारी से लेकर बड़े अफसरों ने आम लोगों को बेच दिया और इस एवज में मोटी रकम वसूली। अवैध ढंग से बंदोबस्त करायी गयी जमीन का म्यूटेशन भी करा लिया गया। बाद में सीसीएल ने इसी जमीन को अधिग्रहित कर करीब 3000 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान भी कर दिया। करीब 400 लोगों को सीसीएल में विभिन्न पदों पर नौकरी भी दे दी।

    जब प्रशासन को मिली जानकारी
    चतरा के उपायुक्त को जब इस पूरे मामले की जानकारी मिली, तो टंडवा सीओ को जांच का आदेश दिया था। इसमें कहा गया है कि सराढू, कुंडी, कुमड़ांग, देवलगढ़ा, बिगलात, कुड़लोंगा, कुड़ांग खुर्द की जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना भारत सरकार द्वारा जब जारी की गयी थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर गैरमजरुआ खास खाते की भूमि को कुछ सरकारी अधिकारियों और भू माफियायों की सांठगांठ से ग्रामीणों के नाम करा लिया गया।

    रजिस्टर टू में भी भारी छेड़छाड़
    रजिस्टर टू में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है। भू माफियायों की मिलीभगत से कुछ अफसरों ने छेड़छाड़ की है। पिछले 30 से 40 साल का मालगुजारी रसीद भी कटा ली गयी है। जमाबंदी पूरी तरह से संदेहास्पद है।

    ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
    इस पूरे मामले पर ग्रामीणों ने चतरा उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। वैसे व्यक्ति, जिन्हें गलत ढंग से सीसीएल में नौकरी दी गयी है, उन्हें हटाने, भुगतान किये गये मुआवजा को वापस कराने की भी मांग की गयी है। ग्रामीणों ने सिमरिया के एसडीओ को भी इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा है और कार्रवाई की मांग की है।

    मिले हुए थे अधिकारी
    सरकार जमीन को बेचने के मामले में टंडवा अंचल में पदस्थापित छह से अधिक अंचलाधिकारी स्तर के पदाधिकारी शामिल रहे हैं। इसके पहले के तीन उपायुक्तों को भी इस बात की पूरी जानकारी थी कि चतरा के मगध और आम्रपाली में भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है। इस पूरे मामले की अगर ईमानदारी से जांच हो, तो बीडीओ, सीओ और एलआरडीसी स्तर के एक दर्जन अधिकारी नपेंगे। किसी भी व्यक्ति के नाम जमीन बंदोबस्त करने के एवज में प्रति एकड़ दस लाख रुपये की वसूली पूर्व के अंचलाधिकारी करते थे। वन विभाग के अधिकारियों को भी अलग से पैसा मिलता था। उस समय सीसीएल के कुछ अधिकारियों ने इस गड़बड़ी पर सवाल भी खड़ा किया था। उन्हें देख लेने की धमकी भी दी गयी थी।

    टीपीसी उग्रवादियों के नाम भी जमीन
    इन दोनों कोल परियोजनाओं के आसपास की भूमि टीपीसी के कई बड़े उग्रवादियों के नाम से की गयी थी। अब उनके परिजन यहां नौकरी कर रहे हैं। उन्हें मुआवजा के रूप में भी मोटी रकम की भुगतान की गयी है। टीपीसी का ही इस कोल परियोजना पर एक तरह से दबदबा है।

    Officials sold government land in Tandwa
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