दिल्ली से अतुल
देशभर में कोरोना की दूसरी लहर के कमजोर पड़ने के साथ ही एक नयी बीमारी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है, जिसे ब्लैक फंगस कहा जा रहा है। म्यूकरमायकोसिस नामक इस नयी आफत ने कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। राजस्थान ने इसे महामारी घोषित कर दिया है, जबकि केंद्र ने बाकी राज्यों से भी इसके अनुरूप फैसला करने को कहा है। सीडीसी यानि सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक यह एक दुर्लभ, लेकिन खतरनाक फंगल संक्रमण है, जिसका इलाज अब तक नहीं ढूंढ़ा जा सका है। यह फंगस वातावरण में प्राकृतिक तौर पर पाया जाता है। यह इंसानों पर तभी हमला करता है, जब हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है। हवा में मौजूद यह फंगल स्पोर्स सांस के जरिये हमारे फेफड़ों और साइनस में पहुंच कर उन पर असर डालते हैं। यह फंगस शरीर में लगे घाव या किसी खुली चोट के जरिये भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
यह साइनस क्षेत्र से आंखों में चला जाता है और वहां से सीधा मस्तिष्क में प्रवेश करता है। इससे आंखों की रोशनी तो जाती ही है, समय रहते इलाज नहीं करवाने की स्थिति में मौत भी हो सकती है। विशेषज्ञों ने ब्लैक फंगस को लेकर चेताया है कि प्रतिरोधक क्षमता कम और शुगर लेवल ज्यादा होने, हेवी स्टेरॉयड लेने तथा हफ्ते भर आइसीयू में रहकर इलाज करवाकर लौटे मरीजों को इससे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस बीमारी से मजबूत प्रतिरोधक क्षमता की मदद से ही मुकाबला किया जा सकता है, इसलिए लोगों की सतर्कता हमें ब्लैक फंगस से लड़ने में बहुत मददगार साबित होगी। मगर ध्यान देने योग्य बात यह है कि नाक बंद होने के सभी मामलों को बैक्टीरियल इंफेक्शन न समझें, विशेष रूप से कोरोना मरीजों में। सबसे जरूरी यह है कि डॉक्टर की सलाह लेने और इलाज शुरू करने में बिलकुल भी देरी न करें। यदि धूल वाली जगह पर जायें, तो मास्क का प्रयोग जरूर करें। म्यूकरमाइकोसिस मरीज के साइनस के साथ आंख, दिमाग, फेफड़ों या त्वचा पर भी हमला कर सकता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।