जनप्रतिनिधियों का सवाल हमें ही नहीं मालूम कहां हुआ छिड़काव, तो निगरानी कैसी?
बरवाडीह:- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), बरवाडीह में मंगलवार को प्रखंड स्तरीय अस्पताल प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त करने, मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, परिसर की सुरक्षा मजबूत करने और विभिन्न कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।बैठक में दवा क्रय, दरवाजे-खिड़कियों की मरम्मत, बागवानी, वाटर फिल्टर अधिष्ठापन, फेस कैमरा, प्रोजेक्टर, सोलर व्यवस्था और बिजली से संबंधित कार्यों पर विचार-विमर्श किया गया। अस्पताल परिसर की सुरक्षा को लेकर पूरी बाउंड्री पर कंटीले तार लगाने का मुद्दा भी उठाया गया।

डीडीटी छिड़काव पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल..
बैठक में पंचायत समिति सदस्य प्रवीण कुमार ने डीडीटी छिड़काव को लेकर सवाल उठाए। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें ही जानकारी नहीं है कि प्रखंड क्षेत्र में कहां-कहां छिड़काव कराया गया है। ऐसे में छिड़काव कार्य की वास्तविक स्थिति और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं।जनप्रतिनिधियों ने छिड़काव के पिछले एक वित्तीय वर्ष और वर्तमान अवधि का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध कराने की मांग की। छिड़काव कहां-कहां कराया गया, इस पर कितनी राशि खर्च हुई और कार्य की निगरानी किस स्तर पर की गई, इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत बताई गई।

कैंटीन संचालन पर भी हुई चर्चा…
बैठक में अस्पताल की कैंटीन के संचालन को लेकर भी चर्चा हुई। वर्तमान में कुंदन कुमार सिंह कैंटीन का संचालन कर रहे हैं। बैठक में उन्हें ही आगे कार्य करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि इस संबंध में किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान नहीं किया जाएगा।बैठक में प्रमुख सुशीला देवी,प्रखंड विकास पदाधिकारी रेशमा रेखा मिंज, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनुपमा एक्का, आयुष चिकित्सक, पेयजल विभाग के कनीय अभियंता पीयूष कुमार, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) अरुण कुमार, शिक्षा पदाधिकारी, पंचायत समिति सदस्य प्रवीण कुमार, प्रखंड तथा FARZ NGO के प्रतिनिधि समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।बैठक में अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया। अब देखना होगा कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और डीडीटी छिड़काव का पूरा लेखा-जोखा कब तक उपलब्ध कराया जाता है।

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