रांची। झारखंड में सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजनीतिक मोर्चेबंदी तेज करने का संकल्प लिया है। रांची में आयोजित भाजपा झारखंड प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन 25 अक्टूबर को राज्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में भाजपा ने सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और आदिवासी हितों की अनदेखी समेत कई गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा ने इन मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाने और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि युवाओं, किसानों, महिलाओं, आदिवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचेंगे।
बाबूलाल मरांडी ने पेश किया राजनीतिक प्रस्ताव
रांची के सुकुरहुट्टू स्थित हवेली बैंक्वेट हॉल में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और मधु कोड़ा समेत अन्य नेताओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
प्रस्ताव में झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था की समस्याएं बढ़ रही हैं। पार्टी ने सरकार पर जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया।
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
भाजपा ने राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से राज्य में कथित भ्रष्टाचार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी, महिलाओं की सुरक्षा और खनिज संपदा से जुड़े मुद्दों को उठाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।
भाजपा नेताओं ने राज्य में अपराध की घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
हालांकि, ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं। इन पर राज्य सरकार का पक्ष सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
आदिवासी अधिकार और जमीन के मुद्दे पर भी आंदोलन की तैयारी
राजनीतिक प्रस्ताव में आदिवासी समुदाय के अधिकारों, जमीन की सुरक्षा और कथित घुसपैठ के मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासियों के हितों की अनदेखी हो रही है और उनकी जमीन से जुड़े मामलों पर सरकार पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है।
पार्टी ने इन मुद्दों को लेकर जनजागरण अभियान चलाने और जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने का संकल्प लिया। भाजपा नेताओं ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और राज्य की पहचान से जुड़े सवालों पर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
पंचायत चुनाव और पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा उठा
बैठक में पंचायत चुनाव कराने और पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठाई गई। भाजपा ने राज्य में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था और पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़े विषयों पर सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
पार्टी का कहना है कि इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है, ताकि स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो सके और संबंधित वर्गों को उनका अधिकार मिल सके।
गांव-गांव और घर-घर पहुंचेगी भाजपा
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भाजपा ने संगठन को मजबूत करने और राज्य सरकार के खिलाफ जनता के बीच अभियान चलाने पर जोर दिया। पार्टी की रणनीति के तहत कार्यकर्ता गांवों और घरों तक पहुंचकर सरकार के कामकाज से जुड़े सवाल उठाएंगे।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में हुई इस बैठक को झारखंड में भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा ने संकल्प लिया कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आदिवासी अधिकार, महिला सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर पार्टी अपना अभियान जारी रखेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा का प्रस्तावित जनजागरण अभियान राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है और सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।



