बोकारो: झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के सभी 11 गेट खोल दिए गए हैं। गेट बंद होने से बाधित कर्मचारियों और अधिकारियों की आवाजाही फिर से बहाल हो गई है। विस्थापित अप्रेंटिस संघ नियोजन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की और जिला प्रशासन को संयंत्र में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने लिया मामले का संज्ञान
बोकारो स्टील प्लांट के गेट बंद होने और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने के मामले में प्रबंधन ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रविवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। प्रशासन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों को हटाकर सभी गेट खुलवा दिए गए हैं। इसके बाद कर्मचारियों की आवाजाही फिर शुरू हो गई।
गेट बंद होने से प्रभावित हुआ था कामकाज
नियोजन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे विस्थापितों ने बोकारो स्टील प्लांट के प्रवेश द्वारों पर जाम लगा दिया था। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों के आने-जाने के साथ कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही भी प्रभावित हुई थी।
प्लांट प्रबंधन ने अदालत में औद्योगिक संचालन और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं उठाई थीं। प्रबंधन का कहना था कि संयंत्र में उत्पादन सुचारु रखने के लिए कर्मचारियों, तकनीकी टीमों और जरूरी सामग्रियों की निर्बाध आवाजाही आवश्यक है।
विस्थापितों की नियुक्ति की मांग पर आंदोलन
विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य संबंधित संगठनों की प्रमुख मांग बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन से जुड़ी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विस्थापित परिवारों और प्रशिक्षित अप्रेंटिसों की मांगों का समाधान किया जाना चाहिए।
गेट खुलने के बाद भी विस्थापितों का आंदोलन और अनशन जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में संयंत्र प्रबंधन, जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच मांगों को लेकर समाधान निकालना महत्वपूर्ण होगा।
प्रशासन को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अदालत में दिए गए आश्वासनों के समर्थन में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि संयंत्र में कर्मचारियों की आवाजाही और कामकाज में दोबारा बाधा नहीं आनी चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और विस्थापितों की नियुक्ति से जुड़े विवाद के समाधान पर रहेगी।


