बरवाडीह। बरवाडीह में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। कभी एम्बुलेंस में फैली अव्यवस्था, कभी अस्पताल के फर्श पर पड़े यूज किए गए सिरिंच और खून के धब्बे, और अब झाड़ियों में सैकड़ों डब्बे एक्सपायरी फोलिक एसिड की दवाएं—यह सिलसिला विभागीय लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है।ताजा मामला बरवाडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत रेलवे पोल संख्या 260/6 के पास का है।जहां झाड़ियों में सैकड़ों डब्बे एक्सपायरी दवाएं मिली हैं। हैरानी की बात यह है कि दवाएं नए और चमचमाते डिब्बों व पेटियों में सुरक्षित अवस्था में पाई गईं। जानकारी के अनुसार, ये दवाएं अगस्त 2025 में एक्सपायर हो चुकी थीं।जिन्हें नियमानुसार नष्ट किया जाना था।लेकिन इसके बजाय खुले में फेंक दिया गया। यह स्थान राजकीय प्लस टू हाई स्कूल के बेहद करीब है, जिससे बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।उधर प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा सरकारी दवाओं का इस तरह खुले में मिलना बेहद चिंताजनक है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है। संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।इसके अलावे उप-प्रमुख बिरेंद्र जायसवाल ने कहा “यह स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला है। एक्सपायरी दवाओं को नष्ट न करना सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।अस्पताल प्रबंधन समिति सदस्य सह पंचायत समिति सदस्य प्रवीण कुमार (बरवाडीह-पूर्वी) ने कहा अस्पताल से जुड़ी इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। एक्सपायरी दवाओं को झाड़ियों में फेंकना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ भी है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
विभाग मौन, कार्रवाई सिर्फ कागजों तक?
चौंकाने वाली बात यह है कि एक के बाद एक मामले सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अब तक मौन है। जिला स्तर पर अधिकारी लगातार बैठकों में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बातें तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अब देखना यह लाजमी होगा कि इस बार भी कार्रवाई के नाम पर खाना-पूर्ति की जाएगी या फिर वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर ठोस कार्रवाई होगी।
चिकित्सा प्रभारी का पक्ष नहीं मिला….
इस पूरे मामले में जब चिकित्सा प्रभारी डॉ. मंटू कुमार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा, जिससे विभागीय चुप्पी और सवालों को और बल मिला है।



