रांची/कोलकाता। कथित GST घोटाले और फर्जी इनवॉइस के जरिए वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई फर्जी GST बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच के तहत की गई।

कई ठिकानों पर एक साथ पहुंची ED की टीम

ED की कार्रवाई झारखंड और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग स्थानों पर की गई। इससे पहले भी एजेंसी ने इस मामले में रांची, जमशेदपुर और कोलकाता समेत कई जगहों पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसी फर्जी कंपनियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

फर्जी GST इनवॉइस से जुड़ा है मामला

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कथित नेटवर्क में ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के GST इनवॉइस तैयार किए गए। इन बिलों के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने और उसे दूसरी कंपनियों तक पहुंचाने का आरोप है।

ED की पिछली जांच में 135 कथित शेल कंपनियों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया था, जो झारखंड, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सक्रिय बताया गया था। एजेंसी के अनुसार इस नेटवर्क के जरिए 734 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी ITC से जुड़ी गतिविधियां सामने आई थीं।

DGGI की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामले की जांच की शुरुआत जमशेदपुर स्थित Directorate General of GST Intelligence (DGGI) की शिकायतों के आधार पर हुई थी। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया कि फर्जी GST क्रेडिट से जुड़े लेनदेन के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

इस मामले में ED ने मई 2025 में तलाशी अभियान के दौरान कई आरोपितों को गिरफ्तार किया था। एजेंसी की ओर से बाद में बताया गया कि आरोपितों के खिलाफ रांची की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।

जांच में वित्तीय लेनदेन की पड़ताल

ताजा कार्रवाई के दौरान ED की टीम कथित फर्जी कंपनियों, GST दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित GST धोखाधड़ी से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरीके से किया गया।

फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और तलाशी के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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