पलामू: शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के बीच पलामू के सतीश कुमार गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का सहारा बने हुए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को वह मुफ्त में ट्यूशन पढ़ाते हैं। उनकी इस पहल का असर यह है कि अब तक उनके द्वारा पढ़ाए गए 200 से अधिक बच्चे मैट्रिक की परीक्षा पास कर चुके हैं। फिलहाल 300 से ज्यादा विद्यार्थी उनसे पढ़ाई कर रहे हैं।
सतीश कुमार पलामू के चैनपुर प्रखंड स्थित पनेरी बांध इलाके में बच्चों को पढ़ाते हैं। उनके पास आसपास के पांच से अधिक गांवों के विद्यार्थी पढ़ने पहुंचते हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं, जो निजी ट्यूशन या महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। सतीश इन विद्यार्थियों को गणित और विज्ञान पढ़ाते हैं। उनके पास पहली कक्षा से लेकर मैट्रिक तक के छात्र पढ़ रहे हैं।
मूल रूप से गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के पेशका दुल्दुलवा गांव के रहने वाले सतीश कुमार का परिवार खेती पर निर्भर है। वह अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई करते हैं और इसी के साथ बच्चों को भी पढ़ाते हैं। वर्तमान में वह नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय से गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने बीएड की डिग्री भी हासिल की है।
सतीश ने वर्ष 2017 में इंटर की परीक्षा पास की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई के दौरान उन्हें भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने घर-घर जाकर ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि कई गरीब बच्चे सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण ट्यूशन नहीं ले पा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने ऐसे बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने का निर्णय लिया।
धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और सतीश ने अपने मामा के घर पर ही विद्यार्थियों को बुलाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। आज उनकी यह मुहिम सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि पैसे की कमी के कारण गांव-घर के कई प्रतिभाशाली बच्चे पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। इसी वजह से उन्होंने जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा देने का काम शुरू किया, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी पढ़ाई में बाधा न बने।
सतीश के पास पढ़ने वाले बच्चों में से कुछ विद्यार्थी अपनी इच्छा से उन्हें हर महीने 200 से 300 रुपये तक देते हैं। हालांकि किसी बच्चे के लिए यह राशि देना अनिवार्य नहीं है। उनका प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल सके।
सतीश कुमार जिस इलाके में बच्चों को पढ़ाते हैं, वह मेदिनीनगर से करीब 18 से 20 किलोमीटर दूर है। मेदिनीनगर में कई बड़े कोचिंग और शैक्षणिक संस्थान हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चे आर्थिक कारणों से वहां नहीं जा पाते। ऐसे विद्यार्थियों के लिए सतीश कुमार की पहल काफी मददगार साबित हो रही है।
सातवीं कक्षा के छात्र मयंक प्रियदर्शी का कहना है कि सतीश कुमार बच्चों को अच्छी तरह पढ़ाते हैं और गरीब विद्यार्थियों की मदद भी करते हैं। वहीं छात्र आयुष शर्मा ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को यहां पढ़ने का अवसर मिलता है। छात्रों के मुताबिक, कई ऐसे विद्यार्थी भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर रहे हैं।
सतीश कुमार की यह पहल बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर किसी में दूसरों की मदद करने का जज्बा हो, तो वह कई बच्चों के भविष्य को बेहतर दिशा दे सकता है। उनकी मुफ्त शिक्षा की मुहिम आज पलामू के ग्रामीण इलाकों में गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई राह बन रही है।


