गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले से चोरों के हौसले बुलंद होने की एक बड़ी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां त्योहार की आड़ में चोरों ने बाजार समिति परिसर में खड़े ट्रकों को अपना निशाना बनाया। चोरों ने एक या दो नहीं बल्कि एक साथ 15 ट्रकों से कुल 24 बैट्रियों और 30 टर्मिनलों की चोरी कर ली। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से स्थानीय वाहन मालिकों और चालकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। बुधवार की सुबह जब चालकों और ट्रक मालिकों को इस सामूहिक चोरी की जानकारी मिली, तो हड़कंप मच गया। इसके बाद तुरंत पचम्बा थाना पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
घटना के संबंध में बाजार समिति के सुरक्षा प्रहरी ने बताया कि मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात लगभग ढाई बजे जब उसकी नींद खुली, तो उसने परिसर में कुछ लोगों की संदिग्ध चहलकदमी देखी। उसने जब शोर मचाया, तो अंधेरे का फायदा उठाकर अज्ञात चोर वहां से भाग निकले। उधर, सूचना मिलते ही एफसीआई ट्रक ओनर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलचंद साहू मौके पर पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली। खोजबीन के दौरान एक हैरान करने वाला वाकया तब सामने आया, जब परिसर के एक बाथरूम से चोरी की गई बैट्रियों में से कई बैट्रियां बरामद हो गईं। साथ ही, मौके पर चोरों का एक मोबाइल फोन भी छूटा हुआ मिला, जिस पर थोड़ी ही देर में एक कबाड़ीवाले का फोन बजने लगा। ट्रक मालिकों ने जब वह कॉल रिसीव किया, तो कॉलर ने बैट्रियों के बारे में पूछताछ की, जिससे इस चोरी के पीछे किसी बड़े सिंडिकेट या कबाड़ी नेटवर्क के शामिल होने के पुख्ता संकेत मिले हैं।
घटना से आक्रोशित ट्रक मालिकों का कहना है कि इस तरह की सामूहिक चोरियों से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघ के अध्यक्ष कमलचंद साहू ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि न सिर्फ गिरोह के चोरों को गिरफ्तार किया जाए, बल्कि इस अवैध सामान को खरीदने वाले कबाड़ीवाले को भी बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाए। पचम्बा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि पुलिस को चोरों का छूटा हुआ मोबाइल फोन और कई अन्य अहम सुराग हाथ लगे हैं। बरामद बैट्रियों को कब्जे में ले लिया गया है और शेष बैट्रियों की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर मामले का बहुत जल्द खुलासा कर लिया जाएगा और सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।


