रामगढ़/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन के निधन के गहरे शोक के बीच भी सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। मां के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने शुक्रवार को रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास से जरूरी सरकारी फाइलों का निपटारा किया। इस दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी उनसे मिलने पहुंचे और आवश्यक फाइलें सौंपीं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्य सचिव लगभग आधा दर्जन जरूरी सरकारी फाइलें लेकर नेमरा पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने इन फाइलों पर आवश्यक कार्रवाई की। बताया गया कि ये ऐसे मामले थे, जिन पर तत्काल निर्णय लेना जरूरी था। इस दौरान राज्य के कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा हुई।

शोक के बीच जारी रखा प्रशासनिक कामकाज

मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। परिवार में शोक का माहौल है और इस दौरान उनसे मिलने के लिए जनप्रतिनिधियों, नेताओं, अधिकारियों और अन्य लोगों का आना-जाना जारी है।

इसी बीच मुख्यमंत्री ने जरूरी सरकारी कार्यों को आगे बढ़ाया। मुख्य सचिव के साथ फाइलों पर चर्चा और उनके निपटारे से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रही। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में फाइलों से जुड़े विशिष्ट विभागों या फैसलों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

7 अक्टूबर को हुआ था रूपी सोरेन का निधन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का 7 अक्टूबर 2026 की शाम रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में निधन हो गया था। वह करीब 80 वर्ष की थीं। अस्पताल में उन्हें सांस लेने में परेशानी के बाद भर्ती कराया गया था और उनकी हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया था।

रूपी सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक रहे दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी थीं। शिबू सोरेन का निधन अगस्त 2025 में हुआ था। रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार सहित झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई थी।

नेमरा में हुआ अंतिम संस्कार

रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को रामगढ़ जिले के पैतृक गांव नेमरा में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता, राजनीतिक नेता और अन्य लोग पहुंचे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को मुखाग्नि दी।

मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने नेमरा में रहकर पारिवारिक रस्मों में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्होंने आवश्यक सरकारी कार्यों का भी निपटारा किया।

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