रांची/लंदन: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार के ‘दावोस’ और ‘यूनाइटेड किंगडम’ (UK) दौरे के ऐतिहासिक परिणाम सामने आने लगे हैं। वैश्विक निवेश मंचों पर राज्य की मजबूत पैरवी के बाद, देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने जिंदल समूह ने झारखंड के विकास में सहभागी बनने के लिए ₹70,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
लंदन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जिंदल समूह के प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार के अधिकारियों को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) सौंपा। यह निवेश स्टील, परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
पतरातू में लगेगा 6 MTPA का स्टील प्लांट
निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा स्टील सेक्टर में खर्च होगा। जिंदल समूह की योजना पतरातू में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाला अत्याधुनिक एकीकृत स्टील प्लांट स्थापित करने की है। यह प्लांट ‘लो-एमिशन’ तकनीक पर आधारित होगा, जो रक्षा, परिवहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का निर्माण करेगा।
परमाणु और सौर ऊर्जा: झारखंड बनेगा ‘ग्रीन हब’
केंद्र सरकार की SHANTI नीति के तहत, जिंदल समूह ने राज्य में 1,400 मेगावाट की परमाणु विद्युत परियोजना और 140 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना का प्रस्ताव रखा है। यह कदम न केवल झारखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि औद्योगिक डी-कार्बनकरण (De-carbonization) के लक्ष्य को भी प्राप्त करने में मदद करेगा।
रोजगार की बहार: 60,000 से अधिक पद
इस मेगा निवेश का सबसे बड़ा फायदा राज्य के युवाओं को होगा। सरकारी अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 11,000 प्रत्यक्ष (Direct) और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष (Indirect) रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे परिवहन, लॉजिस्टिक्स और MSME जैसे स्थानीय क्षेत्रों को व्यापक मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि झारखंड की स्थिर नीति और खनिज संपदा वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही है। यह निवेश झारखंड को भारत की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला (Manufacturing Value Chain) में एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।



