हैदराबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करीब आठ महीने के अंतराल के बाद एक अहम रॉकेट मिशन के साथ वापसी की तैयारी में है। 4 सितंबर 2026 की सुबह GSLV F17 रॉकेट के जरिए EOS-5 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इस मिशन पर देश की नजर इसलिए भी है, क्योंकि यह लगातार दो PSLV मिशनों में आई समस्याओं के बाद ISRO की अगली बड़ी उड़ान होगी।

देश पर रखेगा लगातार नजर

ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, GSLV F17 के जरिए EOS-5 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इस सैटेलाइट को पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था। इसे करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की योजना है।

EOS-5 का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की निगरानी करना होगा। सैटेलाइट से देश के विभिन्न हिस्सों की बार-बार तस्वीरें और अहम जानकारियां प्राप्त की जा सकेंगी। इससे मौसम की निगरानी और तेजी से बदलने वाली प्राकृतिक घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

बाढ़ और जंगल की आग की मिलेगी जानकारी

EOS-5 से बाढ़, चक्रवात, बादल फटने और जंगल की आग जैसी घटनाओं की निगरानी को मजबूत करने की उम्मीद है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को घटनाओं की जानकारी तेजी से मिल सकती है। मौसम विभाग, कृषि योजना और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा का उपयोग किया जा सकेगा।

2021 की नाकामी से लिया सबक

इससे पहले 12 अगस्त 2021 को GSLV F10 के जरिए EOS-03 सैटेलाइट लॉन्च करने का प्रयास किया गया था। मिशन के दौरान क्रायोजेनिक स्टेज में तकनीकी समस्या आने के कारण सैटेलाइट निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो सका था।

अब EOS-5 को उसी क्षमता को आगे बढ़ाने वाले मिशन के रूप में देखा जा रहा है। इस मिशन की सफलता से भारत की जियोस्टेशनरी अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

GSLV पर बढ़ा भरोसा

PSLV से जुड़े परीक्षण और जांच की प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद GSLV Mk-II के जरिए इस मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी रॉकेट ने हाल में NASA-ISRO NISAR मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया था। NISAR मिशन की सफलता के बाद ISRO की क्रायोजेनिक तकनीक को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है।

मार्च 2027 तक कई बड़े लॉन्च की तैयारी

ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, मार्च 2027 तक संगठन करीब सात रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इनमें भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान का पहला बिना चालक वाला G1 मिशन भी शामिल है।

चालू वित्त वर्ष में ISRO का करीब 12 सैटेलाइट तैयार करने और आठ रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य है। इन अभियानों में संचार, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े मिशन शामिल होंगे। साथ ही ये भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों और अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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