रांची: झारखंड में सजायाफ्ता कैदियों की समयपूर्व रिहाई का मामला चर्चा में है। राज्य सरकार ने 53 कैदियों को जेल से रिहा करने के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी है। इनमें कई चर्चित नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले के पीछे रिहाई के बाद दोबारा अपराध होने की आशंका समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखे जाने की बात सामने आई है।
53 कैदियों की रिहाई के प्रस्ताव पर क्या हुआ?
झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 30 जुलाई 2026 को हुई बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कैदियों के आचरण, जेल में बिताई गई अवधि, कानूनी प्रावधानों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट पर विचार किया गया।
राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक में 79 कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इनमें 26 कैदियों की समयपूर्व रिहाई पर सहमति बनी, जबकि 53 कैदियों के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली। इस मामले का उल्लेख झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी किया गया था।
फहीम खान और अनिल शर्मा के नाम भी चर्चा में
रिहाई के प्रस्ताव खारिज होने की खबर के बीच फहीम खान, अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली जैसे नाम भी चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन कैदियों की रिहाई पर विचार करते समय संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को महत्व दिया गया।
हालांकि, प्रत्येक कैदी के मामले में अलग-अलग परिस्थितियां और कानूनी पहलू हो सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की रिहाई संबंधी स्थिति को समझने के लिए संबंधित सरकारी आदेश और न्यायालय के निर्देश देखना जरूरी है।
अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया फैसला
समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों पर विचार करते समय कैदी के जेल में आचरण, सजा की अवधि, संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट, जेल प्रशासन के आकलन और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाता है।
रिहाई का प्रस्ताव स्वीकार होना अपने आप में तत्काल जेल से बाहर आने की गारंटी नहीं होता। इसी तरह, किसी प्रस्ताव को खारिज किए जाने और अदालत द्वारा रिहाई पर रोक लगाए जाने के बीच कानूनी अंतर है।
झारखंड हाईकोर्ट में भी मामला उठा
कैदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित मामला झारखंड हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। 8 सितंबर 2026 के आदेश में अदालत ने दर्ज किया था कि राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद ने 26 कैदियों की समयपूर्व रिहाई की सिफारिश की थी, जबकि 53 कैदियों के प्रस्ताव खारिज किए गए थे। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 19 नवंबर 2026 की तारीख दी गई थी।
अब इस मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और संबंधित सरकारी आदेश महत्वपूर्ण होंगे।


