रांची: झारखंड में जमीन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 25 दिनों में अलग-अलग मामलों में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में अंचल कार्यालयों में रिश्वतखोरी, जमीन के दस्तावेज गायब करने, सरकारी और वन भूमि से संबंधित कथित अनियमितताओं तथा भूमि अधिग्रहण मुआवजे में गड़बड़ी के आरोप शामिल हैं।
एसीबी की कार्रवाई का दायरा सरकारी कर्मचारियों से लेकर जमीन के लेन-देन में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा है। चतरा, रांची, हजारीबाग और रामगढ़ से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियां की गई हैं।
दाखिल-खारिज के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप
चतरा सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को जमीन के दाखिल-खारिज के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहीं, रांची के नामकुम अंचल में दाखिल-खारिज से संबंधित दस्तावेज गायब करने के मामले में तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया।
इन मामलों में एसीबी संबंधित दस्तावेजों, रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
वन भूमि और सरकारी जमीन के मामलों में भी कार्रवाई
हजारीबाग में वन भूमि और सरकारी जमीन से जुड़े कथित घोटाले के मामले में भी कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जांच में सरकारी तथा गैरमजरुआ खास किस्म की जमीन को कथित रूप से अवैध तरीके से हासिल करने, उसकी बिक्री और गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
एसीबी की कार्रवाई में जमीन के विक्रेताओं और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां किस तरह की गईं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
NH-33 मुआवजा भुगतान में कथित गड़बड़ी
रामगढ़ जिले के मांडू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित अनियमितताओं का मामला भी जांच के दायरे में है। करीब 1.92 एकड़ अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं।
इस मामले में तत्कालीन अमीन बालेश्वर प्रसाद और भूमि अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक प्रवीण कुमार सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। एसीबी मुआवजे के निर्धारण, दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच
जमीन से जुड़े मामलों में तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। इसके अलावा, सरकारी काम कराने के नाम पर लोगों से कथित तौर पर पैसे मांगने वाले बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
जमीन के दाखिल-खारिज, रिकॉर्ड में सुधार और मुआवजा भुगतान जैसी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर एसीबी संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर रही है।
आगे की जांच पर टिकी नजरें
लगातार हो रही गिरफ्तारियों से जमीन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसी की सक्रियता सामने आई है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि इन मामलों में किन-किन लोगों की भूमिका रही और आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य सामने आते हैं। फिलहाल, मामलों की जांच जारी है।

