रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हाई स्कूल ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर भर्ती से जुड़े मामले में नागेंद्र नाथ परिहार की सिविल रिव्यू याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में पहले दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। याचिका 14 महीने की देरी से दाखिल की गई थी।
यह मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत हाई स्कूल ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर भर्ती से संबंधित है।
मेरिट लिस्ट में कम अंक के कारण नहीं हुआ था चयन
JSSC ने अदालत को बताया था कि सत्यजीत कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर विचार किया गया था। याचिकाकर्ता ने BC-2 श्रेणी के तहत आवेदन किया था, लेकिन मेरिट लिस्ट में BC-1 और BC-2 श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में उनके अंक कम थे। इसी वजह से उनका चयन नहीं हो सका।
JSSC की इस दलील के आधार पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पहले याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नागेंद्र नाथ परिहार ने एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
खंडपीठ के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल की।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए रिव्यू याचिका खारिज कर दी। अदालत में JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने पक्ष रखा।
इस फैसले के साथ ही याचिकाकर्ता को इस सिविल रिव्यू याचिका के जरिए राहत नहीं मिल सकी।

