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    Home»Jharkhand Top News»झामुमो कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक: सुदिव्य कुमार सोनू का तीन दशक लंबा राजनीतिक सफर
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    झामुमो कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक: सुदिव्य कुमार सोनू का तीन दशक लंबा राजनीतिक सफर

    shivam kumarBy shivam kumarSeptember 6, 2026No Comments4 Mins Read
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    गिरिडीह: झारखंड के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 की सुबह निधन हो गया। उनके निधन के साथ झारखंड की राजनीति में करीब 37 वर्षों तक सक्रिय रहे एक ऐसे नेता का सफर थम गया, जिसकी शुरुआत झामुमो के एक प्राथमिक सदस्य के रूप में हुई थी। संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दो चुनावों में हार मिली, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा। वर्ष 2019 में पहली बार विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी जीत दर्ज करने के बाद हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

    सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और झामुमो अलग राज्य आंदोलन की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल था। पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया। वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर झामुमो का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। यह उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआती महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक थी।

    इसके बाद वह लगातार पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे और गिरिडीह में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। करीब दो दशक तक संगठन में काम करने के बाद वर्ष 2009 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। झामुमो के टिकट पर गिरिडीह सीट से मैदान में उतरे सुदिव्य सोनू को इस चुनाव में सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक सक्रियता जारी रखी।

    वर्ष 2014 में उन्होंने दूसरी बार गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भी उन्हें जीत नहीं मिली और वह दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी ने गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की थी। लगातार दो चुनावों में हार के बाद भी सुदिव्य सोनू ने अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखा और तीसरे प्रयास की तैयारी में जुटे रहे।

    वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरे सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। उन्हें 80,871 वोट मिले, जबकि शाहाबादी को 64,987 वोट प्राप्त हुए। करीब एक दशक के चुनावी संघर्ष के बाद मिली इस जीत ने उन्हें गिरिडीह की राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया।

    विधायक बनने के बाद शिक्षा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख रहे। सर जेसी बोस विश्वविद्यालय की स्थापना, पीरटांड़ क्षेत्र में सिंचाई परियोजना तथा मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े प्रस्तावों को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा में रही।

    वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य सोनू एक बार फिर गिरिडीह सीट से चुनाव मैदान में उतरे। उनका मुकाबला फिर भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ। इस बार मुकाबला काफी करीबी रहा। सुदिव्य सोनू को 94,042 वोट मिले, जबकि शाहाबादी को 90,204 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने 3,838 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार विधानसभा में जगह बनाई।

    2024 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। गिरिडीह सीट से झामुमो के टिकट पर चुनाव जीतकर मंत्री बनने के लिहाज से भी उनका राजनीतिक सफर अहम रहा।

    वर्ष 2026 में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के दौरान भी सुदिव्य सोनू की भूमिका सामने आई। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री होने के नाते वह सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं को स्थगित करने और जांच से जुड़े फैसलों को लेकर छात्रों के साथ संवाद में उन्होंने सरकार का पक्ष रखा।

    सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर लंबा और संघर्षपूर्ण रहा। 1989 में झामुमो के प्राथमिक सदस्य के रूप में शुरू हुई उनकी यात्रा संगठनात्मक जिम्मेदारियों से होते हुए 2009 और 2014 की चुनावी हार, 2019 की पहली विधानसभा जीत, 2024 की लगातार दूसरी जीत और कैबिनेट मंत्री पद तक पहुंची। 6 सितंबर 2026 को उनके निधन के साथ झारखंड की राजनीति में उनके करीब चार दशक लंबे सक्रिय सफर का अंत हो गया।

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