सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें अस्पतालों में पड़ीं, मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों का सहारा
-मुकेश कुमार सिंह
लातेहार (आजाद सिपाही)। लातेहार जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सदर अस्पताल समेत विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गयी हैं।

लेकिन इन मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को इनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। सदर अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन और विभिन्न सीएचसी में उपलब्ध करायी गयी अल्ट्रासाउंड मशीनों के संचालन को लेकर यही स्थिति बतायी जा रही है। बताया जाता है कि लातेहार सदर अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से सीटी स्कैन मशीन स्थापित की गयी है।

वहीं जिले के कई सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध करायी गयी हैं। एक अल्ट्रासाउंड मशीन की कीमत करीब 50 लाख रुपये तक बतायी जा रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च कर मशीनें लगाने के बावजूद यदि उनका नियमित संचालन नहीं हो रहा है, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

टेक्नीशियन नहीं होने से मशीनों का उपयोग प्रभावित : स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित टेक्नीशियन की आवश्यकता होती है। लेकिन संबंधित अस्पतालों में पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण मशीनों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। जांच की आवश्यकता वाले मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

मरीजों को कब मिलेगा मशीनों का लाभ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मशीनें उपलब्ध होना तभी सार्थक है, जब मरीजों को समय पर और कम खर्च में जांच की सुविधा मिले। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक टेक्नीशियन की व्यवस्था जल्द करे, ताकि सरकारी संसाधनों का पूरा उपयोग हो सके और मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर न रहना पड़े। वही मशीन का रखरखाव भी जैसे तैसे है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की मशीनें लगाने के बाद उनके संचालन की जिम्मेदारी कौन लेगा और मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ कब से मिलेगा? वहीं इस संबंध में लातेहार सिविल सर्जन राजमोहन खलखो से दूरभाष पर बात करने की कोशिश की गयी तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।

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