Close Menu
Azad SipahiAzad Sipahi
    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Monday, October 5
    • Jharkhand Top News
    • Azad Sipahi Digital
    • रांची
    • हाई-टेक्नो
      • विज्ञान
      • गैजेट्स
      • मोबाइल
      • ऑटोमुविट
    • राज्य
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
    • रोचक पोस्ट
    • स्पेशल रिपोर्ट
    • e-Paper
    • Top Story
    • DMCA
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Azad SipahiAzad Sipahi
    • होम
    • झारखंड
      • कोडरमा
      • खलारी
      • खूंटी
      • गढ़वा
      • गिरिडीह
      • गुमला
      • गोड्डा
      • चतरा
      • चाईबासा
      • जमशेदपुर
      • जामताड़ा
      • दुमका
      • देवघर
      • धनबाद
      • पलामू
      • पाकुर
      • बोकारो
      • रांची
      • रामगढ़
      • लातेहार
      • लोहरदगा
      • सरायकेला-खरसावाँ
      • साहिबगंज
      • सिमडेगा
      • हजारीबाग
    • विशेष
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • देश
    • दुनिया
    • राजनीति
    • राज्य
      • मध्य प्रदेश
    • स्पोर्ट्स
      • हॉकी
      • क्रिकेट
      • टेनिस
      • फुटबॉल
      • अन्य खेल
    • YouTube
    • ई-पेपर
    Azad SipahiAzad Sipahi
    Home»Breaking News»तेजस ने भुला दिया ’71 की जंग का हीरो ‘मारुत’.
    Breaking News

    तेजस ने भुला दिया ’71 की जंग का हीरो ‘मारुत’.

    shivam kumarBy shivam kumarJanuary 17, 2021No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram LinkedIn Pinterest Email
    लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके-1ए के सौदे ने भारत के पहले स्वदेशी जेट ‘मारुत’ को भुला दिया है जिसने 1971 की जंग में पाकिस्तानियों के छक्के छुड़ा दिए थे। 1960 के दशक का यह लड़ाकू बमवर्षक विमान उस समय की तकनीक के मुकाबले काफी उन्नत था। 147 विमानों में से सिर्फ दो विमान बचे हैं जिनमें एक एचएएल के बेंगलुरु स्थित हेरिटेज काम्प्लेक्स में और दूसरा म्यूनिख के एक म्यूजियम में रखा है।
    एयरक्राफ्ट डिजाइन और उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए 50 के दशक में वायुसेना से भारतीय डिजाइन के एयरक्राफ्ट से संबंधित जरूरतें पूछी गईं। विमान का डिजाइन करने की जिम्‍मेदारी एचएएल के सौंपी गई। भारत सरकार के बुलावे परअगस्‍त, 1956 में जर्मन एयरोनॉटिकल इंजीनियर कर्ट वाल्डेमर टैंक और उनके डिप्‍टी हेर मिटेलहपर बेंगलुरू पहुंचे। उन्हें एचएफ-24 विमान का डिजाइन करने वाली टीम की अगुआई करने का जिम्मा सौंपा गया। इस टीम में तीन भारतीय डिजाइनर थे और विमान को विकसित करने का जिम्‍मा दोनों जर्मनों पर था। अप्रैल, 1959 में उन्‍होंने लकड़ी के ग्‍लाइडर का पहला प्रोटोटाइप बनाया। इस टू सीटर ग्‍लाइडर ने 24 मार्च, 1960 तक 78 सफल उड़ानें भरीं। इस तरह हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड (एचएएल) ने 1960 के दशक में जर्मन एयरोनॉटिकल इंजीनियर कर्ट वाल्डेमर टैंक के सहयोग से स्वदेशी लड़ाकू बमवर्षक विमान एचएफ-24 ‘मारुत’ तैयार किया था।
    भारत के इस पहले जेट विमान को स्पिरिट ऑफ द टेम्पेस्ट यानी ‘तूफान की आत्मा’ की संज्ञा दी गई। सफल उत्पादन और सक्रिय सेवा में जाने वाला यह पहला एशियाई जेट लड़ाकू विमान था। 17 जून, 1961 को इसने अपनी पहली उड़ान भरी और 1 अप्रैल 1967 को पहला मारुत जेट आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना को दिया गया था। भारतीय वायुसेना के लिए कुल 147 जेट बनाए गए थे। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से जमीनी हमले के मिशन के लिए किया गया। इस बीच, अप्रैल 1969 में वायुसेना की टाइगर हेड स्क्वाड्रन को मारुत जेट से लैस किया गया। दो स्क्वाड्रन ने 1971 में पाकिस्‍तान के साथ हुई जंग में हिस्‍सा लिया। यह विमान राजस्‍थान सेक्‍टर में जमीनी टुकड़ियों की मदद कर रहे थे। मारुत ने एक पखवारे में 300 से ज्‍यादा सैन्‍य उड़ानें भरीं। न ही किसी विमान को मार गिराया गया और न ही किसी को दुश्‍मन एयरक्राफ्ट से नुकसान पहुंचा।
    मारुत ने भारत के साथ 1971 में पाकिस्तान से हुई जंग में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद विशेष रूप से लोंगेवाला की लड़ाई में भाग लिया। दिसम्बर, 1973 तक तीसरी स्क्वाड्रन को मारुत से लैस किया गया। तकनीकी खामियों के चलते 1982 तक मारुत विमान तेजी से खत्म होने लगे जिसके चलते एयरफोर्स हेडक्‍वार्टर ने एचएफ-24 को हटाने का फैसला किया। दशक के अंत तक धीरे-धीरे सभी विमान समाप्त हो गए। 147 विमानों में से सिर्फ दो विमान बचे हैं जिनमें एक एचएएल के बेंगलुरु स्थित हेरिटेज काम्प्लेक्स में और दूसरा म्यूनिख के एक म्यूजियम में रखा है। मारुत विमान में इस्तेमाल किये गये इंजनों में मुख्य रूप से कमी थी। इनके लिए बेहतर इंजन या वैकल्पिक पावरप्लांट विकसित करने के कोई ठोस प्रयास नहीं किये गए जबकि शुरू में इसे सक्षम इंटरसेप्टर विमान या सुपरसोनिक सक्षम लड़ाकू विमान जैसा विकसित करने की कल्पना की गई थी।
    एयरक्राफ्ट विशेषज्ञों के मुताबिक नीची उड़ानों में मारुत का कोई जवाब नहीं था लेकिन बेहद फुर्ती से काम करने में ये उतने सक्षम नहीं थे। इनमें मेंटेनेंस की भी समस्‍या थी। 1982 तक वायुसेना का मानना था कि इनका इस्‍तेमाल तत्‍कालीन जरूरतों को देखते हुए नहीं किया जा सकता था। यह विमान 60 के दशक में जिस तकनीक के साथ बनाये गए थे, अगर इसी तकनीक को आगे की सरकारें विकसित करने में लगी रहतीं तो आज विमानों के डिजाइन और विकास की दिशा में भारत बहुत आगे होता।
    Share. Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleविश्व के सबसे बड़े पर्यटक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है केवड़िया: मोदी
    Next Article कांग्रेस ने कोरोना वैक्सीन के मूल्य और निर्यात पर उठाए सवाल
    shivam kumar

      Related Posts

      भारत-वेस्टइंडीज T20 का ऐसा क्रेज, टिकट के लिए रातभर रांची स्टेडियम के बाहर डटे फैन्स

      October 5, 2026

      श्रीनगर में मुंबई के नागरिक की जमीन खरीद पर सियासी बवाल, डोमिसाइल कानूनों पर उठे सवाल

      October 5, 2026

      रांची में कोढ़ा गैंग से पुलिस की मुठभेड़, सरगना रंगीला के पैर में लगी गोली; दो साथी गिरफ्तार

      October 4, 2026
      Add A Comment

      Comments are closed.

      Recent Posts
      • भारत-वेस्टइंडीज T20 का ऐसा क्रेज, टिकट के लिए रातभर रांची स्टेडियम के बाहर डटे फैन्स
      • श्रीनगर में मुंबई के नागरिक की जमीन खरीद पर सियासी बवाल, डोमिसाइल कानूनों पर उठे सवाल
      • रांची में कोढ़ा गैंग से पुलिस की मुठभेड़, सरगना रंगीला के पैर में लगी गोली; दो साथी गिरफ्तार
      • बेतला में सेवा यात्रा के रथ पर उमड़ा जनसैलाब, गूंजे जयकारे
      • एशियन गेम्स 2026: पाकिस्तान को 19 रनों से धूल चटाकर भारत ने जीता गोल्ड, एशियन गेम्स में मिला 19वां स्वर्ण पदक
      Read ePaper

      City Edition

      Follow up on twitter
      Tweets by azad_sipahi
      Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

      Palamu Division

      • Garhwa
      • Palamu
      • Latehar

      Kolhan Division

      • West Singhbhum
      • East Singhbhum
      • Seraikela Kharsawan

      North Chotanagpur Division

      • Chatra
      • Hazaribag
      • Giridih
      • Koderma
      • Dhanbad
      • Bokaro
      • Ramgarh

      South Chotanagpur Division

      • Ranchi
      • Lohardaga
      • Gumla
      • Simdega
      • Khunti

      Santhal Pargana Division

      • Deoghar
      • Jamtara
      • Dumka
      • Godda
      • Pakur
      • Sahebganj

      Subscribe to Updates

      Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

      © 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.
      • Privacy Policy
      • Terms
      • Accessibility

      Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

      Go to mobile version