माले: मालदीव ने भारत से लिए गए कर्ज की आखिरी 50 मिलियन डॉलर की किस्त चुका दी है। 17 सितंबर को किए गए इस भुगतान के साथ भारत के प्रति 150 मिलियन डॉलर की बकाया राशि का निपटारा हो गया। यह रकम 2019 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सुविधा के जरिए मालदीव को उपलब्ध कराई गई थी। भुगतान पूरा होने के साथ ही पिछले करीब दो वर्षों से T-Bill की मियाद बढ़ाने यानी रोल-ओवर की प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है।
हालांकि, भारत का बकाया चुकाने के बाद मालदीव के सामने विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चुनौती बढ़ गई है। मालदीव की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है और विदेशी मुद्रा भंडार में हाल के महीनों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
मालदीव के वित्त मंत्री ने क्या कहा?
मालदीव के वित्त मंत्री हसन ज़रीर ने कहा कि सरकार ने 2019 में SBI से लिए गए 150 मिलियन डॉलर के लोन का पूरा भुगतान कर दिया है और 50 मिलियन डॉलर की अंतिम किस्त भी चुका दी गई है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार पहले से वित्तीय योजना बनाकर और सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में नियमित योगदान के जरिए कर्ज प्रबंधन कर रही है।
मालदीव के वित्त मंत्रालय ने भी कहा कि सरकार ने कर्ज की समय-सीमा से पहले वित्तीय इंतजाम करने, सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में नियमित राशि जमा करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों तथा विकास सहयोगियों के साथ बातचीत जारी रखने जैसे कदम उठाए हैं।
2019 में लिया गया था यह कर्ज
यह वित्तीय सुविधा 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह की सरकार के दौरान उपलब्ध कराई गई थी। इसका उद्देश्य मालदीव के बजट को वित्तीय सहायता देना था। मूल रूप से यह राशि 200 मिलियन डॉलर थी।
भारत ने कुल राशि में से 50 मिलियन डॉलर को अनुदान यानी ग्रांट के रूप में देने की घोषणा की थी। इसका मतलब था कि इस हिस्से को वापस नहीं करना था और मालदीव के लिए 100 मिलियन डॉलर की देनदारी बाकी रह गई थी।
मुइज्जू सरकार के सत्ता संभालने के बाद जनवरी 2024 में पहली किस्त का भुगतान किया गया था। इसके बाद भारत ने मालदीव को भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देते हुए T-Bill की मियाद कई बार आगे बढ़ाई।
2024 से चल रहा था T-Bill का रोल-ओवर
भारत ने मई 2024 में 50 मिलियन डॉलर के T-Bill को पहली बार आगे बढ़ाया था। इसके बाद दूसरे बिल की समय-सीमा सितंबर 2024 में बढ़ाई गई। 2025 में भी भुगतान की समय-सीमा को लेकर यही प्रक्रिया जारी रही।
11 मई 2026 को मालदीव सरकार ने T-Bill की मियाद खत्म होने से पहले 50 मिलियन डॉलर का भुगतान कर दिया था। इसके बाद भारत के प्रति बकाया राशि घटकर 50 मिलियन डॉलर रह गई थी। अब 17 सितंबर को अंतिम 50 मिलियन डॉलर का भुगतान भी पूरा कर दिया गया है।
मालदीव का विदेशी कर्ज भी घटा
मालदीव के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही तक देश का गारंटीकृत विदेशी कर्ज घटकर 3.59 अरब डॉलर रह गया। वित्त वर्ष 2025 के अंत में यह आंकड़ा 4.05 अरब डॉलर था। इससे पता चलता है कि मालदीव अपने विदेशी कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में भुगतान कर रहा है।
हालांकि, कर्ज कम होने के साथ विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर दबाव भी बना हुआ है। भारत को अंतिम भुगतान के बाद इस महीने मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार 600 मिलियन डॉलर से नीचे जाने का अनुमान है।
तेजी से घटा मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार
मालदीवियन मॉनेटरी अथॉरिटी (MMA) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 643.8 मिलियन डॉलर था। वहीं जुलाई 2026 में मालदीव का कुल आयात बिल 339.26 मिलियन डॉलर रहा था।
मालदीव की अर्थव्यवस्था में आयात की बड़ी भूमिका है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार में कमी देश के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन अगस्त तक यह घटकर 643.8 मिलियन डॉलर रह गया।
जुलाई 2026 में मालदीव ने 36.7 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया। आयात और निर्यात के बीच बड़े अंतर के कारण देश को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
अब मुइज्जू सरकार के सामने क्या चुनौती?
भारत को कर्ज की आखिरी किस्त चुकाने के बाद मालदीव ने एक महत्वपूर्ण विदेशी वित्तीय दायित्व पूरा कर लिया है। लेकिन इसके साथ ही देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर तत्काल दबाव बढ़ सकता है। सरकार के सामने अब आयात की जरूरतों को पूरा करने, पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रखने और आगामी कर्ज भुगतान के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए रखने की चुनौती है।
मालदीव सरकार का कहना है कि सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में नियमित योगदान और पहले से वित्तीय योजना तैयार करने जैसे कदमों के जरिए वह विदेशी मुद्रा की उपलब्धता तथा कर्ज भुगतान की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।



