-बारिश में भी नहीं डिगे ग्रामीणों के कदम, बेतला वन विभाग कार्यालय का घेराव कर सौंपा ज्ञापन,नाका नहीं हटा तो कार्यालय में होगी तालाबंदी
-पलामू किला बैरियर के खिलाफ सैकड़ों महिला-पुरुषों का हल्लाबोल, फसल मुआवजा ₹1,000 प्रति डिसमिल करने और वन्यजीवों के हमले में मौत पर ₹20 लाख व सरकारी नौकरी की मांग
बरवाडीह:- पलामू किला के नाका शुल्क को लेकर वन विभाग और ग्रामीणों के बीच टकराव तेज होता दिख रहा है। ₹1,950 शुल्क के विरोध में संयुक्त ग्राम सभा मंच के बैनर तले सैकड़ों महिला-पुरुषों ने बारिश के बीच बेतला स्थित वन विभाग कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और नाका-बैरियर हटाने की मांग पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया। आंदोलन के बाद फोरेस्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मंच ने वन विभाग को 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया। चेतावनी दी गई कि तय समय के भीतर पलामू किला का नाका नहीं हटाया गया, तो वन विभाग कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी।बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों की भीड़ डटी रही। नाका शुल्क और वन विभाग की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा नारों में साफ झलका। प्रदर्शन के दौरान वन विभाग मुर्दाबाद” “वन विभाग चोर है और पलामू किला का बैरियर उखाड़कर फेंकना होगा” पलामू किला हमरा ऐतिहासिक धरोहर है ,स्थानीय लोगो पर एहसान नही जैसे नारे लगाए गए। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि पलामू किला जाने के लिए ₹1,950 शुल्क की व्यवस्था आखिर क्यों लागू है। उन्होंने नाका हटाने और शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कन्हाई सिंह ने विधायक पर लगाया संरक्षण देने का आरोप…
मेदनी आजाद संघ के सचिव सतीश सिंह चेरो ने मनिका विधायक रामचंद्र सिंह पर निशाना साधा उन्होंने ने कहा उनके इशारे पर छूट दिया जा रहा है।ये हमारी विरासत है ये विभाग का नही है।जो हमपर विभाग एहसान कर रहा है। वहीं, संयुक्त ग्राम सभा मंच के नेतृत्वकर्ता कन्हाई सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक का आशीर्वाद प्राप्त होने के कारण वन विभाग मनमानी कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीणों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, विधायक पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
₹162 का मुआवजा नाकाफी, ₹1,000 प्रति डिसमिल की मांग….
ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के मुआवजे पर भी नाराजगी जताई। उनकी मांग है कि ₹162 प्रति डिसमिल की दर को बढ़ाकर ₹1,000 प्रति डिसमिल किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फसल बर्बाद होने पर किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ती है।
वन्यजीवों के हमले में मौत पर ₹20 लाख और सरकारी नौकरी…..
आंदोलनकारियों ने जंगली जानवरों के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर पीड़ित परिवार को ₹20 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि वन्यजीवों से होने वाले जान-माल के नुकसान की स्थिति में प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए । बारिश के बीच हुए घेराव और नारेबाजी ने नाका शुल्क के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया। ज्ञापन सौंपकर मंच ने साफ कर दिया कि अब उसकी नजर वन विभाग की कार्रवाई पर है।अगर 30 दिनों के भीतर नाका नहीं हटा तो कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।अब देखना लाजमी होगा कि विभाग क्या कदम उठाती है।मौके पर रुपाली देवी, श्यामली शर्मा, श्यामदेव सिंह, सितली देवी, दीपक तिवारी, विनोद यादव, सुनीता देवी, मानो देवी, सतीश यादव, रीता देवी, दानी सिंह, सीताराम सिंह, संगीता कुमारी, बसंती देवी, महेश्वरी सिंह, गाड़ी के ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

