नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी सिर्फ छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है। उन्हें बच्चों के व्यवहार, आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर रखनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से छात्रों को नशे की बुराई के प्रति जागरूक करने और उनके स्क्रीन टाइम को कम करने में मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों को बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रयास करना चाहिए। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों के बचपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए और उनके जीवन में बचपन की सहजता और खुशियां बनाए रखने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने बदलते समय के साथ शिक्षण के तरीकों में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने क्लासरूम में तकनीक के इस्तेमाल, नए शिक्षण तरीकों और विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर शिक्षकों के साथ चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि नई पीढ़ी की जरूरतों और उम्मीदों को समझते हुए शिक्षा में आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
बच्चों में बढ़ती नशे की समस्या का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कोई छात्र नशे की चपेट में आ चुका है या नहीं। ऐसे में शिक्षकों को जागरूकता फैलाने के साथ-साथ छात्रों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर भी बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवारों की संख्या कम होने के कारण बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका पहले की तुलना में और महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने शिक्षकों से छात्रों के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझने पर भी जोर दिया।
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने एक शिक्षिका से छात्रों को सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए तैयार करने और उनकी झिझक दूर करने के तरीकों के बारे में पूछा। शिक्षिका ने बताया कि पब्लिक स्पीकिंग के लिए आत्मविश्वास बेहद जरूरी है। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रभावशाली व्यक्तित्व को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनका ‘Aura’ देखकर उनका आत्मविश्वास कम हो रहा है। इस पर प्रधानमंत्री ने भी मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या पब्लिक स्पीकिंग के लिए ‘Aura’ नहीं होना चाहिए।
एक अन्य शिक्षिका ने महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने की अपनी पहल के बारे में प्रधानमंत्री को बताया। इस पर पीएम मोदी ने वाराणसी से सांसद रहते हुए स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर किए गए अपने प्रयासों को याद किया। उन्होंने कहा कि लोगों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व के बारे में जागरूक करना और नियमित जांच के लिए प्रेरित करना समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं ने अपने शिक्षण अनुभव भी साझा किए। शिक्षकों ने बताया कि किस तरह उन्होंने नवीन तकनीकों और अलग-अलग तरीकों के जरिए कक्षा में पढ़ाई को विद्यार्थियों के लिए आसान, रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने शिक्षण कार्य के अलावा समाज और समुदाय के हित में की गई विभिन्न पहलों के बारे में भी प्रधानमंत्री को जानकारी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने अपनी मेहनत और नए प्रयोगों के जरिए न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने में योगदान दिया है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला है।
वहीं, शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 48 स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश के उत्कृष्ट शिक्षकों के योगदान को पहचान देना और उनकी मेहनत, लगन तथा समर्पण को सम्मानित करना है।
