नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने रेलवे से जुड़ी आठ मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश के अलग-अलग राज्यों के 31 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और ट्रेनों के परिचालन में तेजी आने के साथ भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी।
इन परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। वहीं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में करीब 540 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ाया जाएगा।
रेलवे परियोजनाओं से जुड़ी बड़ी बातें
केंद्रीय कैबिनेट ने 8 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी
परियोजनाएं देश के 31 जिलों को कवर करेंगी
पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 656 किमी नेटवर्क बढ़ेगा
करीब 4,790 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी
लगभग 56 लाख आबादी को फायदा मिलने का अनुमान
दक्षिण भारत के चार राज्यों में 540 किमी रेल नेटवर्क का विस्तार
करीब 2,121 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी
कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात की ढुलाई क्षमता बढ़ेगी
अतिरिक्त 27 MTPA माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान
कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा
पश्चिम और मध्य भारत में 656 किमी रेल नेटवर्क का विस्तार
कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनकी कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये बताई गई है।
इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बगदेही) चौथी रेल लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन शामिल हैं।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन परियोजनाओं से मौजूदा रेल नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
4,790 गांवों को मिलेगा बेहतर रेल संपर्क
इन परियोजनाओं के जरिए करीब 4,790 गांवों में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने का अनुमान है। इससे लगभग 56 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी और रेलवे की परिचालन क्षमता तथा सेवा की विश्वसनीयता में सुधार आएगा।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच होगी आसान
नई रेल परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विरातेश्वर मंदिर, अमरकंटक, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर प्रमुख हैं।
माल ढुलाई को भी मिलेगा बड़ा फायदा
इन रेल मार्गों का इस्तेमाल कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं के परिवहन के लिए किया जाता है। रेल मंत्रालय के अनुसार, क्षमता बढ़ने से करीब 27 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित हो सकती है।
रेल परिवहन को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल माध्यम माना जाता है। मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के साथ तेल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने में मदद मिलेगी।
दक्षिण भारत के चार राज्यों में 540 किमी नेटवर्क का विस्तार
कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में पांच मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनकी कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
अराक्कोणम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन — 77 किमी
व्हाइटफील्ड-बंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन — 47 किमी
होसुर-ओमालूर दोहरीकरण — 147 किमी
सेलम-करूर-डिंडीगुल दोहरीकरण — 159 किमी
सिकंदराबाद (घटकेसर)-काजीपेट मल्टी-ट्रैकिंग — 110 किमी
इन पांच परियोजनाओं से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क करीब 540 किलोमीटर बढ़ेगा।
2,121 गांवों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
दक्षिण भारत की इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने का अनुमान है। इससे लगभग 52 लाख लोगों को फायदा मिलने की संभावना है।
परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे के परिचालन को सुचारू करना, व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ कम करना और ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ाना है।
तिरुपति से कोडाईकनाल तक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इन परियोजनाओं के पूरा होने से तिरुपति, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर, कोटिलिंगेश्वर देवालय, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, होसुर किला, मेट्टूर डैम और कोडाईकनाल हिल्स समेत कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा।
इसके अलावा सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयार मंदिर, नमक्कल किला, यादगिरिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरी मंदिर जैसे स्थलों को भी बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
पीएम गति शक्ति के तहत तैयार की गई परियोजनाएं
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल बनाना, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
रेलवे के मुताबिक, नई परियोजनाओं से यात्रियों के साथ-साथ माल और सेवाओं की आवाजाही भी अधिक सुगम होगी।

