नई दिल्ली/रांची: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच छह राज्यों से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन राज्यों में मतदाता सूची की जांच के दौरान करीब 1,600 संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। इनमें सबसे ज्यादा मामले कर्नाटक से सामने आए हैं। वहीं, झारखंड में भी तीन विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है, जो अफगानिस्तान के रहने वाले बताए गए हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन छह राज्यों में कुल करीब 9.86 करोड़ मतदाता हैं। इसके मुकाबले मतदाता सूची में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान का आंकड़ा काफी कम है। हालांकि, यह आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि कई राज्यों ने ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड नहीं रखा है।
कर्नाटक में सबसे ज्यादा 716 संदिग्ध विदेशी नागरिक
SIR के दौरान कर्नाटक में 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है। इनमें बेंगलुरु नॉर्थ के 545 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने भी विदेशी नागरिकों की पहचान किए जाने की पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ जिले में 40, उत्तर कन्नड़ में 22 और उडुपी में 47 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। इन मामलों में नेपाल के अलावा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं।
झारखंड में तीन अफगानी नागरिकों की पहचान
झारखंड में SIR के दौरान तीन विदेशी नागरिकों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है। ये तीनों अफगानिस्तान के नागरिक बताए गए हैं।
राज्य में पांच अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में करीब 2.21 करोड़ मतदाताओं के नाम थे, जबकि SIR से पहले मतदाता सूची में लगभग 2.646 करोड़ नाम दर्ज थे।
इस तरह मसौदा सूची में पहले की तुलना में करीब 43.6 लाख नाम कम हुए। हालांकि, मतदाता सूची से नाम कम होने का अर्थ यह नहीं है कि हटाए गए सभी नाम विदेशी नागरिकों के थे।
केरल और गोवा में भी मिले सैकड़ों मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में विदेशी नागरिकता रखने वाले करीब 500 लोगों के नाम मतदाता सूची में पाए गए। वहीं, गोवा में विदेशी पासपोर्ट रखने वाले 419 संदिग्ध लोगों की पहचान की गई।
मेघालय में नेपाली मूल के दो पुरुषों के नाम मतदाता सूची में मिले। दोनों की शादी भारतीय महिलाओं से हुई है। उनकी पहचान पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावसिनराम में की गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, दोनों के नाम सूची से हटाए गए और मामले को गृह विभाग के पास भेजा गया।
दूसरी ओर, मिजोरम में मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज होने का कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया।
कई राज्यों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग डेटा नहीं
SIR के दौरान संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान से जुड़े आंकड़ों को लेकर एक अहम बात सामने आई है। कई राज्यों ने ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड नहीं रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क किया गया, उनमें से 11 ने जवाब दिया।
इनमें छह राज्यों ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों की संख्या बताई, जबकि चार राज्यों ने कहा कि उनके पास इस संबंध में अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ओडिशा ने ऐसे मामले मिलने की बात कही, लेकिन उनकी संख्या नहीं बताई।
पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना के अधिकारियों ने भी संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग डेटा उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्यों को SIR के दौरान संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग से आंकड़ा जुटाने का निर्देश नहीं दिया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके पास ऐसे मामलों का समेकित या राज्यवार डेटा उपलब्ध नहीं है।
इस वजह से सामने आए करीब 1,600 मामलों को सभी राज्यों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की कुल संख्या नहीं माना जा सकता। यह आंकड़ा उन्हीं राज्यों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिन्होंने ऐसे मामलों की संख्या बताई है।
क्यों शुरू किया गया था SIR?
निर्वाचन आयोग ने बिहार में 24 जून 2025 को SIR की शुरुआत की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने के साथ अपात्र नामों को हटाना बताया गया था।
आयोग ने इसके पीछे तेजी से बढ़ते शहरीकरण, लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने, पात्र मतदाताओं के नाम नहीं जुड़ने, मृत्यु की सूचना दर्ज नहीं होने और विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने जैसी वजहों का उल्लेख किया था।
हालांकि, छह राज्यों से सामने आए आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि संदिग्ध विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी का कोई एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए SIR के दौरान ऐसे नागरिकों की वास्तविक संख्या के बारे में देशव्यापी निष्कर्ष निकालने के लिए अधिक व्यापक और व्यवस्थित आंकड़ों की जरूरत होगी।



