बरवाडीह के राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज में स्थापित है यमुना सिंह की प्रतिमा, अब पहली पुत्री मंजू सिंह संभाल रहीं राजनीतिक विरासत
।।रवि कुमार गुप्ता बरवाडीह प्रतिनिधि।।
बरवाडीह : मनिका विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक एवं झारखंड के प्रथम वन एवं पर्यावरण मंत्री स्वर्गीय यमुना सिंह का नाम आज भी क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है। छह बार विधायक निर्वाचित होने वाले यमुना सिंह को क्षेत्र में ‘हाथी सिंह’ के नाम से भी जाना जाता था। बिहार से लेकर अलग झारखंड राज्य बनने तक उनका राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा। झारखंड गठन के बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली पहली सरकार में उन्होंने वन एवं पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। उनके योगदान की स्मृति में बरवाडीह स्थित राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। अब उनकी पहली पुत्री मंजू सिंह पिता की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।

1977 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर, लगातार चार बार बने विधायक…
यमुना सिंह ने वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर मनिका विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष 1980, 1985 और 1990 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित हुए। लगातार चार चुनावों में जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की।वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने फिर वापसी की और भाजपा के टिकट पर विधायक बने। इस तरह उनका राजनीतिक जीवन मनिका विधानसभा क्षेत्र के लंबे चुनावी इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
झारखंड के पहले वन एवं पर्यावरण मंत्री बने….
15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना। इसके बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में बनी पहली सरकार में यमुना सिंह को वन एवं पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी मिली। नवगठित राज्य में वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों के लिहाज से यह महत्वपूर्ण विभाग था।
मनिका विधानसभा क्षेत्र जंगलों और वनवासी आबादी से जुड़ा इलाका है। यहां जल, जंगल और जमीन से संबंधित मुद्दे ग्रामीण जीवन तथा आजीविका के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे क्षेत्र से आने वाले नेता के रूप में यमुना सिंह की राजनीतिक पहचान का यह महत्वपूर्ण अध्याय रहा।

बरवाडीह के राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज में स्थापित है प्रतिमा….
यमुना सिंह की स्मृतियों को संजोने के लिए बरवाडीह स्थित राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा उनके राजनीतिक जीवन और क्षेत्र में उनकी पहचान की याद दिलाती है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया जाता है।कॉलेज परिसर में स्थापित प्रतिमा के कारण नई पीढ़ी को भी उनके राजनीतिक जीवन और योगदान के बारे में जानने का अवसर मिलता है। क्षेत्र के लोगों के लिए यह स्थल उनके सार्वजनिक जीवन की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।
पहली पुत्री मंजू सिंह संभाल रहीं राजनीतिक विरासत….
यमुना सिंह की पहली पुत्री मंजू सिंह अब उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं। मंजू सिंह भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हैं। इसके साथ ही वे अनुसूचित जनजाति मोर्चा से जुड़ी हैं और खरवार एकता मंच की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।
राजनीतिक संगठन के साथ सामाजिक मंच से उनका जुड़ाव उन्हें क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ता है। पिता के लंबे राजनीतिक सफर और जनसेवा से जुड़ी स्मृतियां उनके लिए विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।मंजू सिंह अपने पिता की पुण्यतिथि पर राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज परिसर में अपना अधिकार अपना सम्मान मंच के द्वारा स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देती रही हैं। ऐसे अवसरों पर यमुना सिंह के राजनीतिक जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया जाता है।
2009 में लड़ा आखिरी चुनाव, 2011 में हुआ निधन ..
वर्ष 2000 के बाद मनिका विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में कई बदलाव हुए। वर्ष 2005 के चुनाव में यमुना सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2009 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। यह उनके राजनीतिक जीवन का आखिरी चुनाव रहा। वर्ष 2011 में 11 सितम्बर उनका निधन हो गया।उनके निधन के बाद क्षेत्र की राजनीति में नए चेहरे सामने आए, लेकिन उनके लंबे राजनीतिक सफर की चर्चा आज भी होती है। छह बार विधायक निर्वाचित होने और झारखंड की पहली सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री बनने की उनकी पहचान उनके सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
गारू के कोटाम बैगा टोली से बरवाडीह के बभनडीह तक का सफर……
स्वर्गीय यमुना सिंह मूल रूप से लातेहार जिले के अतिसुदूरवर्ती गारू प्रखंड अंतर्गत कोटाम गांव के बैगा टोली के रहने वाले थे। जंगलों और पहाड़ी इलाकों से घिरे इस क्षेत्र से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और राजनीतिक सक्रियता के बल पर मनिका विधानसभा क्षेत्र में अलग पहचान बनाई। कई वर्षों तक अपने मूल क्षेत्र से जुड़े रहने के बाद वे बरवाडीह प्रखंड के बभनडीह में रहने लगे। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विधायक और झारखंड के प्रथम वन एवं पर्यावरण मंत्री तक का उनका सफर क्षेत्र की राजनीति में आज भी याद किया जाता है।
बिहार विधानसभा के मुख्य सचेतक से झारखंड के प्रथम वन मंत्री तक, ‘हाथी सिंह’ की अलग पहचान….
मनिका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं झारखंड के प्रथम वन एवं पर्यावरण मंत्री स्वर्गीय यमुना सिंह की पहचान सिर्फ सत्ता और सियासत तक सीमित नहीं थी। वे बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। क्षेत्र में उन्हें ‘हाथी सिंह’ के नाम से जाना जाता था। इसके पीछे भी एक खास वजह बतायी जाती है। हाथियों के हमले से लोगों की जान-माल की क्षति होने पर पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसी पहल ने उन्हें आम लोगों के बीच ‘हाथी सिंह’ के रूप में पहचान दिलायी। छह बार विधायक रहे यमुना सिंह की यह पहचान आज भी मनिका और बरवाडीह क्षेत्र में चर्चा का विषय है। उनकी राजनीतिक विरासत अब उनकी पहली पुत्री मंजू सिंह आगे बढ़ा रही हैं।

स्व:यमुना सिंह की पुत्री मंजू सिंह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ तस्वीर
राजनीतिक विरासत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी…
यमुना सिंह का राजनीतिक जीवन मनिका विधानसभा क्षेत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। बरवाडीह के राजा मेदनी राय इंटर कॉलेज परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा उनके जीवन की स्मृतियों को जीवित रखती है। वहीं, उनकी पहली पुत्री मंजू सिंह राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं।
पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का अर्थ केवल उनके नाम को आगे रखना नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव, सामाजिक कार्यों और स्थानीय समस्याओं के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है।

