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    Home»विशेष»घिबली आर्ट के पीछे पागल बनी दुनिया
    विशेष

    घिबली आर्ट के पीछे पागल बनी दुनिया

    shivam kumarBy shivam kumarApril 3, 2025No Comments9 Mins Read
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    विशेष
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में वायरल इस विधा की रोचक कहानी
    जापान की घिबली स्टूडियो से प्रेरणा लेकर अब एआइ में हो गयी शामिल
    नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
    सोशल मीडिया पर इन दिनों एक विशेष प्रकार की कला का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। इसे घिबली आर्ट कहा जा रहा है। यह कला न केवल आम लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है, बल्कि सेलिब्रिटीज और बड़े इवेंट की तस्वीरों को भी घिबली स्टाइल में बदला जा रहा है। एआइ के जरिये घिबली शैली में बनायी गयी इन तस्वीरों का क्रेज दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही इसके कानूनी और रचनात्मक पहलुओं पर भी चर्चाएं तेज हो गयी हैं। आम से लेकर खास तक इस नयी कला के पीछे दीवाने हो गये हैं और यह दीवानगी इतनी बढ़ गयी है कि चैट-जीपीटी भी क्रैश कर जा रहा है। लोगों को इसके संभावित खतरों से आगाह किया जा रहा है, लेकिन कोई सकारात्मक असर पड़ता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह घिबली आर्ट क्या बला है और यह इतनी तेजी से लोकप्रिय क्यों हो रहा है। करीब 30 साल पहले जापान के तीन कलाकारों द्वारा शुरू किया गया घिबली स्टूडियो आज पूरी दुनिया में टॉप पर ट्रेंड कर रहा है, तो इसके पीछे जरूर कोई कारण है। क्या है घिबली आर्ट के पीछे की कहानी और इसका क्या हो सकता है अंतिम परिणाम, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राहुल सिंह।

    दुनियाभर में सोशल मीडिया पर इस वक्त जो एक चीज हर प्रोफाइल पर दिख रही है, वह है घिबली आर्ट। एक्स से लेकर इंस्टाग्राम और फेसबुक तक लोग लगातार एआइ के जरिये अपनी और सेलिब्रिटी की कार्टूननुमा तस्वीरों को देखते और इनका इस्तेमाल करते दिख रहे हैं। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की पहुंच और इसके खतरों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं। दरअसल, जापान की कॉमिक बुक और कार्टून शो के लिए इस्तेमाल होने वाली जिस घिबली आर्ट को बनाने में एक जमाने में कई दिनों से लेकर महीनों का समय लग जाता था, अब एआइ ने उन्हें कुछ ही सेकंड या मिनट में बनाना शुरू कर दिया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह घिबली आर्ट है क्या? इसकी शुरूआत कहां से हुई? चैट जीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया? कौन-कौन इस फीचर का इस्तेमाल कर सकता है? जापान के एक स्टूडियो की आर्ट को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये बार-बार बनाना कानूनी हद तक कितना सही है? घिबली की शुरूआत करने वाले कलाकारों का इस पर क्या कहना है? और इस आर्ट को लेकर एआइ की पहुंच के बारे में क्या चर्चाएं हैं?

    लोगों को इतनी पसंद क्यों आ रही घिबली स्टाइल तस्वीरें
    घिबली तस्वीरों की खास बात यह है कि इसके कैरेक्टर हाथ से बनाये जाते थे। इनमें हमेशा हल्के पेस्टल रंगों का इस्तेमाल होता था और इन्हें तड़क-भड़क से दूर ही दिखाया गया। घिबली आर्ट के विश्लेषकों का कहना है कि घिबली की सादगी और शांति ही लोगों को अपनी ओर खींचती है। ऐसे में कुछ ही वर्षों के अंदर इस स्टूडियो ने करोड़ों लोगों को अपना फैन बना लिया है।

    घिबली का मतलब क्या है
    घिबली एक अरबी-लीबियाइ शब्द है, जिसका अर्थ होता है रेगिस्तान से आती गर्म हवा। जापान में मियाजाकी हयाओ, इसाओ ताकाहाटा और सुजुकी तोशियो ने 15 जून, 1985 को स्टूडियो घिबली की स्थापना की। इसका नाम घिबली इसलिए रखा गया, क्योंकि यह बदलाव का एक प्रतीक, यानी हवा का एक झोंका था।

    चैट-जीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया
    चैट-जीपीटी ने एक सप्ताह पहले अपना बिल्ट-इन इमेज जेनरेशन फीचर शुरू किया। ओपन एआइ के जीपीटी-4ओ टूल ने एआइ चैटबॉट को घिबली स्टाइल की तस्वीरें प्रोसेस करने के फीचर से जोड़ दिया। नतीजा यह रहा कि एआइ ने ऐसे फोटो बनाना शुरू कर दिया, जो कि जापानी एनिमेटर हयाओ मियाजाकी की हाथ से बनायी हुई आर्ट जैसे ही लगते थे। इसके चलते 24 घंटे में ही घिबली इमेज पूरी दुनिया में वायरल होना शुरू हो गयी।
    चौंकाने वाली बात यह है कि यूजरों के निर्देशों और उसके आधार पर तस्वीरों को घिबली स्टाइल में तैयार करने की चैट जीपीटी की क्षमता ने इसे बाकी चैटबॉट से अलग खड़ा कर दिया। जहां मेटा एआइ और एक्स का ग्रोक अभी भी घिबली स्टाइल तस्वीरों में मियाजाकी की तस्वीरों जैसी डिटेल नहीं ला पाये हैं, वहीं चैट जीपीटी का यह स्पेशल फीचर देखते ही देखते वायरल हो रहा है।

    प्रोफाइल फोटो से लेकर बॉलीवुड फिल्म और बहुत कुछ, सब घिबली में बदला
    घिबली आर्ट लोगों को किस कदर पसंद आया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया में बॉलीवुड फिल्मों से लेकर सेलिब्रिटी, लोगों की अपनी प्रोफाइल पिक्चर, निजी यादों की तस्वीरों से लेकर खेल के दृश्यों तक सब कुछ घिबली के अंदाज में बदल चुका है। 2024 के पेरिस ओलंपिक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क तक, सबके घिबली स्वरूप दुनिया में आ चुके हैं।

    घिबली बनाने के लिए चैट जीपीटी पर अभी भी होड़ मची है। कुछ यूजरों ने पहले एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि घिबली वर्जन इमेज चैट जीपीटी के प्रीमियम वर्जन में बनाया जा सकता है। हालांकि बाद में कई यूजरों ने पाया कि यह फ्री वर्जन में काम कर रहा है। इसके बाद चैट जीपीटी यूजरों के बीच तस्वीरों को घिबली में बदलने की होड़ लग गयी। इसी बीच चैट जीपीटी के सीइओ सैम ऑल्टमैन ने एक्स पर ट्वीट कर बताया कि उनके जीपीयू पिघल रहे हैं। दरअसल, चैट जीपीटी जैसे चैटबॉट कमांड से तस्वीरों को क्रिएट करने के लिए ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट, यानी जीपीयू का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेंड के बढ़ने से इनके जीपीयू में दबाव बढ़ता है और ये अत्यधिक गर्म होने लगते हैं, जिससे प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है। ऐसे में जीपीयू को नुकसान से बचाने के लिए कुछ प्रोसेसिंग को रोकना या सीमित करना पड़ता है।

    क्या कहा सैम ऑल्टमैन ने
    सैम ऑल्टमैन ने पोस्ट किया, यह देखना बहुत मजेदार है कि लोग चैट जीपीटी की बनायी तस्वीरों को पसंद कर रहे हैं। लेकिन हमारे जीपीयू पिघल रहे हैं। हम इसे और अधिक कुशल बनाने पर काम करते हुए अस्थायी रूप से कुछ दर सीमाएं लागू करने जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। चैट जीपीटी फ्री टियर को जल्द ही प्रतिदिन 3 जेनरेशन मिलेंगी। हालांकि उनके इस पोस्ट पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो, क्योंकि शनिवार-रविवार को चैट जीपीटी पर घिबली बनाने वालों की इतनी संख्या जुड़ी कि प्लेटफॉर्म क्रैश कर गया। इसके बाद ऑल्टमैन ने पोस्ट कर कहा कि क्या आप सब प्लीज इमेज जनरेट करना थोड़ा कम कर सकते हैं? हमारी टीम को नींद चाहिए!

    कैसे बना सकते हैं घिबली इमेज
    चैट जीपीटी अपने लेटेस्ट मॉडल जीपीटी-4ओ का इस्तेमाल कर रहा है। घिबली इमेज जनरेशन इसी मॉडल से संभव हो पाया है। इसका सबसे रोचक पहलू यह है कि यह स्टूडियो घिबली की प्रसिद्ध कार्टून शैली को बखूबी दोहरा सकता है। कोई भी आसानी के घिबली इमेज जनरेट कर सकता है।

    घिबली के कॉपीराइट से जुड़ा मसला क्या है?
    जैसे-जैसे घिबली तस्वीरें दुनिया में वायरल हुई हैं, वैसे ही इसे लेकर विवाद की भी शुरूआत हुई है। सबसे बड़ा विवाद है एआइ की पहुंच को लेकर। दरअसल, सोशल मीडिया पर विवाद है कि कैसे एआइ कलाकारों के रचनात्मक कार्यों को कुछ ही क्षणों में कॉपी कर लेता है। वह भी इसके लिए उन्हें जरूरी श्रेय और आर्थिक मुआवजा दिये बिना। चैट जीपीटी पर घिबली आर्ट बनाने को लेकर कॉपीराइट का विवाद इन्हीं चर्चाओं के बाद शुरू हुआ है। खुद चैट जीपीटी ने भी प्रीमियम सेवा का इस्तेमाल न करने वाले कई यूजरों को यह संदेश दिया कि वह कॉपीराइट के अंतर्गत आने वाले एनिमेशन स्टूडियो की तरह की तस्वीरें नहीं बना सकता, क्योंकि उसकी आर्ट स्टाइल सुरक्षा मानकों में आती है। इसके बावजूद कुछ ही घंटों बाद चैट जीपीटी पर लोगों ने फिर से घिबली तस्वीरें बनाना जारी रखा।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ओपन एआइ जो कर रहा है, वह न तो कानूनी तौर पर सही है और न ही कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन है। यानी घिबली इमेज बनाना बीच के ग्रे जोन में आता है। अमेरिका की लॉ फर्म नील एंड मैक्डेविट के बौद्धिक संपत्ति मामलों के वकील इवान ब्राउन के मुताबिक, घिबली आर्ट स्टाइल को कॉपीराइट कानून के तहत सुरक्षित नहीं किया गया है। इससे सिर्फ कैरेक्टर और कहानियां सुरक्षित हो सकती हैं। यानी ओपन एआइ सिर्फ ऐसी तस्वीरें बनाकर कोई कानून नहीं तोड़ रहा है।
    हालांकि, ब्राउन ने साफ किया कि हो सकता है कि ओपन एआइ ने अपने मॉडल को जापानी स्टूडियो की रचनात्मक तस्वीरों के आधार पर ही ट्रेनिंग दी हो। यानी उसके जैसी ही तस्वीरें बनाने का कमांड। इससे एक सवाल यह उठता है कि अगर आप हमारा काम सीधे तौर पर कॉपी नहीं कर सकते, तो उसके जैसा ही काम तैयार करना शुरू कर दो। उन्होंने बताया कि कई अदालतें अब इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या एआइ डेवलपर अपने मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट किये हुए काम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    इस बीच आर्टिस्ट कार्ला ओर्टिज, जिन्होंने एआइ तस्वीरें बनाने वाले मॉडल को कॉपीराइट के मामलों में कोर्ट में घसीटा है, ने घिबली आर्ट को लेकर कहा कि यह साफ है कि ओपन एआइ जैसी कंपनियां अब कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम और इसके जरिये अपना गुजारा चलाने वाले लोगों की चिंता नहीं करता। उन्होंने कहा कि ओपन एआइ घिबली का नाम और उसके ब्रांड का इस्तेमाल अपने मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है, जो कि कॉपीराइट का सीधा उल्लंघन है।

    एआइ के घिबली बनाने पर क्या सोचते हैं इसके संस्थापक
    एआइ से घिबली तस्वीरें बनाने के आलोचकों ने एक्स पर हयाओ मियाजाकी के कुछ पुराने वीडियो पोस्ट किये हैं। इनमें घिबली आर्ट के संस्थापक ने एक बार एआइ जेनरेटेड तस्वीरों को लेकर बेहद कड़ी आलोचना की थी और इसे जीवन का अपमान बताया था। खबरों के मुताबिक यह वीडियो 2016 का है, जिसमें वह एआइ की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि यह जीवन का अपमान (इनसल्ट टू लाइफ इटसेल्फ) है और इस तरह के कंटेंट को देख कर उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं होती। मियाजाकी कहते हैं, मैं इस तरह की चीजें देखकर रोमांचित नहीं हो सकता। इसे बनाने वाले लोग दर्द की भावना को नहीं समझते। मैं इसे लेकर बेहद निराश हूं और कभी भी अपनी कला में इस तकनीक को अपनाना नहीं चाहूंगा। मेरे हिसाब से यह जीवन का अपमान है। वह मानते हैं कि कला का असली सार तभी झलकता है, जब इंसान अपने अनुभवों, दर्द, खुशी और संवेदनाओं को चित्रों और कहानियों में उतारता है। लेकिन एआइ आधारित एनीमेशन इस गहराई से कोसों दूर है।

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