तेनुघाट (बेरमो)। चर्चित संतोष पांडेय हत्याकांड में सूबे के शिक्षा मंत्री डुमरी विधायक जगरनाथ महतो के मंझले भाई बैजनाथ महतो समेत सात लोगों को मंगलवार को आजीवन कारावास एवं दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी गयी। तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज प्रथम राजीव रंजन ने सजा सुनायी। सजा सुनाने के बाद अभियुक्त बैजनाथ महतो, गणेश भारती, नेमी पुरी, कैलाश पुरी, जितेंद्र पुरी, नीरज पुरी एवं केवल महतो को तेनुघाट जेल भेज दिया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता कुमार अनंतमोहन सिन्हा ने कहा कि सभी अभियुक्त इस फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। जिला जज प्रथम राजीव रंजन ने उन सातों को संतोष हत्याकांड का बीते चार जनवरी को ही दोषी करार देते हुए तीन अन्य आरोपितों सत्येंद्र गिरि, मेहलाल पुरी एवं सूरज पुरी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। बता दें कि एक लड़की को भगा ले जाने के आरोप में अलारगो ग्राम में वर्ष-2014 में संतोष पांडेय की मौत अलारगो ग्राम में सामूहिक रूप से पिटाई करने के बाद इलाज के क्रम में हुई थी। इस मामले में संतोष के भाई अनंतलाल पांडेय ने डुमरी विधायक जगरनाथ महतो पर भी आरोप लगाया था, जो बाद में गठित एसआइटी की रिपोर्ट के आधार पर निरस्त कर दी गयी थी। यह मामला संतोष के भाई अनंतलाल पांडेय के आवेदन के आधार पर नावाडीह थाना में दर्ज किया गया था।
सामूहिक रूप से पिटाई से 2014 में हुई थी मौत
अनंतलाल पांडेय ने आवेदन में कहा था कि एक लड़की को भगा ले जाने के आरोप में उनके छोटे भाई संतोष कुमार पांडेय की मौत सामूहिक रूप से पिटाई करने से हुई थी। आरोप लगाया था कि बैजनाथ महतो की अगुवाई में जितेंद्र पुरी, नेमी पुरी, गणेश भारती, कैलाश पुरी, केवल महतो, मेघलाल पुरी एवं सूरज पुरी ने संतोष को अमानवीय ढंग से बुरी तरह पीट-पीटकर बेहोश कर दिया था। उसके बाद उसे चंद्रपुरा स्थित डीवीसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु 20 मार्च-2014 को हो गयी। इस संबंध में आरोपपत्र समर्पित होने के बाद मामला स्थानांतरित होकर तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज प्रथम राजीव रंजन की अदालत में आया, जहां अभियोजन की ओर से 34 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये। गवाहों के बयान सुनने एवं उपलब्ध साक्ष्य देखने और दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद जिला जज प्रथम ने सात अभियुक्तों को हत्या का दोषी पाया और तीन को दोषमुक्त कर दिया था। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह और सफाई पक्ष की ओर से अधिवक्ता सत्यनारायण डे, कुमार अनंतमोहन सिन्हा एवं अरुण कुमार सिन्हा ने बहस की।

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