नई दिल्ली। पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए संयुक्त मंच (एनजेसीए) के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकार के 50 से अधिक कर्मचारी संघों ने सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को खत्म करने और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग की।

एनजेसीए ने मांग पूरी नहीं होने पर हस्ताक्षर अभियान, गेट मीटिंग, मशाल जुलूस और संसद मार्च सहित कई विरोध प्रदर्शनों का ऐलान किया। कर्मचारी संघों ने आरोप लगाया कि वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन योजना सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए ‘हानिकारक’ साबित हुई है।

एनजेसीए के बैनर तले आईटीओ स्थित प्यारेलाल भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय रेलवे, रक्षा. डाक, केंद्रीय सचिवालय, स्वायत्त निकायों, अर्धसैनिक बलों, राज्य सरकार और शिक्षकों ने भाग लिया। ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (एआईआरएफ) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) दो प्रमुख रेलवे कर्मचारी संगठन एनजेसीए का हिस्सा हैं।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों के समाधान के लिए एक घोषणा-पत्र की शपथ ली। इसमें एक जनवरी 2004 को या उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों पर लागू राष्ट्रीय पेशन योजना को वापस लेने और उस सभी को सीसीएस के तहत पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने के लिए पेंशन नियमावली 1972 को लागू किया जाये।

इसके अलावा एक जनवरी 2004 को या उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में रिटर्न के साथ संचित कर्मचारी अंशदान जमाकर जीपीएफ योजना लागू किया जाये।

सम्मेलन में पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए अंतरिम कार्य योजना तैयार की गई। इसमें 10-20 फरवरी के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को जेएफआरओपीएस द्वारा ऑनलाइन याचिका प्रस्तुत करना। 21 फरवरी को शाखा स्तर पर रेलवे के सभी कार्यालयों पर रैलियां आयोजित करना। 21 मार्च को जेएफआरओपीएस द्वारा जिला स्तर पर रैली। 21 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रगति की समीक्षा करने और आगे की कार्य योजना के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक।

इसके बाद स्थानीय कार्यालयों पर जागरूकता और जानकारी के लिए गेट मीटिंग का आयोजन। 21 मई को जिला स्तर पर मसाल जुलूस, 21 जून को राज्य स्तर पर राज्यों की राजधानी में रैली का आयोजन और जुलाई एवं अगस्त में मानसून सत्र के दौरान नई दिल्ली में विशाल रैली का आयोजन करना शामिल है।

एनजेसीए के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी मांग पर विचार करेगी और आवश्यक कार्यवाही करेगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हमारे पास विरोध प्रदर्शन करने और देश भर में चक्का जाम का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू की गई एनपीएस और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए अलग-अलग तारीखों और वर्ष से लागू की गई एनपीएस अब सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों के लिए घातक साबित हो रही है, क्योंकि यह किसी भी तरह से परिभाषित गारंटीशुदा ओपीएस से मेल नहीं खाती है।

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