रांची। झारखंड भाजपा में एक नया अध्यक्षीय युग शुरू हो गया है। बुधवार को आधिकारिक तौर पर प्रो. आदित्य साहू को प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति एक ऐसे कार्यकर्ता के लंबे और अनुशासित संघर्ष का चरम बिंदु है, जिसने पार्टी के सबसे निचले पायदान से अपनी यात्रा शुरू की थी।
बूथ से राज्यसभा तक का सफर
आदित्य साहू का राजनीतिक सफर वर्ष 1980 में तब शुरू हुआ, जब मात्र 17 वर्ष की आयु में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली और एक साधारण बूथ कार्यकर्ता बन गए। बिना किसी स्वार्थ और पद की लालसा के शुरू किए गए इस सफर का पहला पड़ाव 1984 में तब आया, जब वे बूथ अध्यक्ष बने। इसके बाद उनकी यात्रा ने रफ्तार पकड़ी। 1989 में वे ओरमांझी मंडल की कार्यसमिति के सदस्य बने और 1991 में मंडल महामंत्री का दायित्व संभाला।
रांची से प्रदेश तक की कमान
1995 में रांची जिला कार्यसमिति का सदस्य बनने के बाद आदित्य साहू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1998 में जिला सदस्यता प्रभारी, 1999 में जिला उपाध्यक्ष और 2003 में वे रांची जिला भाजपा के अध्यक्ष बने। इस पद पर वे लगातार दो कार्यकाल (2003-2010) तक रहे। 2010 में वे प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने और 2015 से 2019 तक प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2019 में उन्हें प्रदेश महामंत्री का पद मिला और राज्यसभा भेजा गया। अब जनवरी 2026 में, 46 साल के निष्ठावान कार्य के बाद, उन्हें पार्टी की सर्वोच्च प्रदेश पदवी – प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है।
शिक्षक से नेता तक का विकास
राजनीति के समानांतर आदित्य साहू ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 1989 से 2009 तक आरटीसी महाविद्यालय में व्याख्याता रहे और 2009 से 2019 तक उप प्राचार्य के पद पर रहे। इसके अलावा वे अरविंदो एकेडेमी, किसान उच्च विद्यालय और शिवाजी प्रतिभा विकास उच्च विद्यालय जैसे संस्थानों से जुड़े रहे। वर्तमान में वे सरस्वती शिशु मंदिर, कुलही ओरमाझी के मुख्य संरक्षक हैं।
आदित्य साहू का यह नियुक्ति भाजपा के उन पुराने गार्ड के लिए एक बड़ा संदेश है, जो लगातार पदों पर बने रहने की होड़ में हैं। उनका यह सफर पार्टी के भीतर एक सामान्य कार्यकर्ता के लिए भी ऊंचे पद तक पहुंचने के रास्ते खुला होने का प्रतीक है। उनकी नियुक्ति के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे झारखंड में पार्टी की रणनीति और संगठन को किस दिशा में लेकर जाते हैं।

