खूंटी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा ने केंद्र सरकार पर मनरेगा के नियमों में बदलाव मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि मनरेगा के नियमों में बदलाव से रोजगार के अवसर घटेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शनिवार को सांसद कालीचरण मुंडा के आवासीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को बोधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि 11 जनवरी से समाहरणालय के समक्ष उपवास धरना देकर मनरेगा बचाओ अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद सभी प्रखंडों और पंचायतों में भी आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मौके पर कांग्रेस के नेताओं ने नए कानून को गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में पारित नया कानून मनरेगा के मांग-आधारित अधिकार को खत्म करता है। पार्टी नेताओं ने केंद्र की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में बदलाव से गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि पहले काम मांगने पर सरकार कानूनी रूप से काम देने के लिए बाध्य थी, जबकि नए कानून में यह सरकार की इच्छा पर निर्भर हो गया है।

वंचित वर्गों पर सीधा असर
नेताओं ने कहा कि मनरेगा का सबसे अधिक लाभ दलित, आदिवासियों और महिलाओं को मिला है। ऐसे में योजना में कटौती या बदलाव इन वर्गों की आजीविका पर सीधा प्रहार है। नए कानून से राज्यों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे झारखंड जैसे राज्यों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

मौके पर पार्टी के आदिवासी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विल्सन तोपनो, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष आमिर हुसैन सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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