रांची: झारखंड के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य योजना’ का दायरा बढ़ाने की ऐतिहासिक तैयारी कर रही है। नई व्यवस्था के तहत अब ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ को अबुआ स्वास्थ्य योजना में ही मर्ज (विलय) कर दिया जाएगा। इस बदलाव के बाद पात्र लाभार्थियों को साल भर में 15 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति पिछले सप्ताह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। अब इस फाइल को विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इसी साल इस नई और एकीकृत व्यवस्था को प्रदेश में लागू कर दिया जाए ताकि मरीजों को अलग-अलग योजनाओं के जटिल नियमों से मुक्ति मिल सके।
राज्य के अस्पतालों को मिलेगी प्राथमिकता नई नीति के अनुसार, मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत सूचीबद्ध सभी बीमारियों का इलाज अब प्राथमिक रूप से झारखंड के ही चिकित्सा संस्थानों में किया जाएगा। सिविल सर्जन अब सीधे राज्य से बाहर रेफर नहीं कर पाएंगे। यदि किसी गंभीर बीमारी का इलाज राज्य के भीतर संभव नहीं है, तभी ‘निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं’ की उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश पर मरीज को बाहर भेजा जाएगा। इसके साथ ही, राज्य के उन निजी अस्पतालों को भी इस योजना से जोड़ने का फैसला लिया गया है जो फिलहाल सीजीएचएस (CGHS) के दायरे में नहीं आते हैं।
किसे और कैसे मिलेगा लाभ? वर्तमान में अबुआ स्वास्थ्य योजना के तहत राशन कार्डधारकों और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को कवर किया जाता है। इस विलय के बाद हार्ट, कैंसर, किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे बेहद महंगे इलाज के लिए मरीजों को कैबिनेट की मंजूरी या लंबी कागजी कार्रवाई का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब तक गंभीर बीमारी योजना में 10 लाख से अधिक की राशि के लिए कैबिनेट की अनुमति अनिवार्य थी, लेकिन अब 15 लाख तक का इलाज सीधा और सुलभ हो जाएगा।
यह कदम न केवल झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को असाध्य रोगों के इलाज के लिए कर्ज के जाल में फंसने से भी बचाएगा।



