तेहरान। ईरान एक बार फिर बड़े नागरिक विद्रोह की चपेट में है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त जनता का गुस्सा अब सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सरेआम फूट पड़ा है। 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान समेत देश के 22 प्रांतों के 46 शहरों में फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी शासन को खत्म कर रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग कर रहे हैं।

आर्थिक बदहाली बनी विद्रोह की मुख्य वजह ईरान में असंतोष का सबसे बड़ा कारण रिकॉर्ड तोड़ महंगाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई दर 42.2% तक पहुंच गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतें 72% तक बढ़ चुकी हैं। इस आर्थिक संकट के बीच ईरान की करेंसी रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, जिससे व्यापारी और छात्र वर्ग भी सड़कों पर उतर आए हैं।

हिंसा और गिरफ्तारी का दौर जारी मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 7 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 119 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ज़ाहेदान, मशहद और कोम जैसे शहरों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

ट्रंप की चेतावनी और ईरान का पलटवार इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार है। इसके जवाब में ईरान ने भी धमकी दी है कि किसी भी अमेरिकी आक्रामक कदम की स्थिति में उसके सैन्य ठिकानों को ‘वैध निशाना’ बनाया जाएगा।

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