आजाद सिपाही संवाददाता
मेदिनीनगर। भारत के उच्च गुणवत्तायुक्त, धुंआरहित कोयला उत्पादन में अपने समय की सिरमौर रही पलामू के राजहरा कोलियरी में एक बार फिर अपने रंग में आ जायेगी। सेंट्रल कोलफिल्ड के अंतर्गत आने वाली इस कोलियरी का पलामू सांसद वीडी राम, छतरपुर विधायक सह भाजपा के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर, सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह और महाप्रबंधक कोटेश्वर राव ने संयुक्त रूप से पुर्न उद्घाटन किया। इस मौके पर सांसद वीडी राम ने कहा कि डेढ़ दशक में इस कोलियरी से 49 लाख 30 हजार टन कोयला निकालने का लक्ष्य रखा गया है।

जबकि इसकी क्षमता 80 लाख टन है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 3 से 5 लाख टन कोयला निकाला जायेगा। कोलियरी के चालू हो जाने से सीसीएल को डेड रॉयलिटी देने से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावे 28 करोड़ का हो रहा घाटा नहीं होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि माइंस में पड़ने वाली दो एकड़ भूमि के रैयत के परिवार के एक सदस्य को नौकरी और प्रावधान के अनुसार मुआवजा दिया जायेगा। एक वर्ष में तीन महीने बरसात के कारण कोलियरी में बंद रहेगी। ओपन कास्ट माइंस है रजहरा: राजहरा कोलियरी सीसीएल का ओपन कास्ट माइंस है। कोलियरी नदी के किनारे मौजूद है, जिस कारण बरसात के दिनों में पानी भरने का डर रहता है। कोलियरी से 12 में से नौ महीने उत्पादन होगा। 49.30 लाख टन कोयला का उत्पादन अगले 15 वर्षों में किया जाना है।

2009 से बंद पड़ी थी कोलियरी: वर्ष 2009-10 से रजहरा कोलियरी बंद पड़ी थी। इसके पुन: शुरू हो जाने से पूरे पलामू के लोगों में खुशी की लहर है। एक अनुमान के तहत इस कोलियरी से प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

कोलियरी बंदी का कारण बना पानी: विगत 24 अक्टूबर 2010 को कोलियरी की भलही खदान में निकटवर्ती सदाबह नदी का पानी भर गया था। इससे उत्खनन कार्य में लगी शॉवेल मशीन डूब गयी थी। इसके पश्चात इस दुर्घटना की जांच करने के लिए 10 नवंबर 2010 को डीजीएमएस द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उत्पादन पर पूर्णत:रोक लगा दी। इस रोक के बाद क्षेत्र के लोगों और कोलियरी में कार्यरत कामगारों ने धरना-प्रदर्शन तक किये, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

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