हेमंत सोरेन को साजिश के तहत फंसाया गया
रांची। राज्यसभा सदस्य सह वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की इडी द्वारा गिरफ्तारी के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करने से पहले मामले के गुण-दोषों को सुनना चाहिए था। सिब्बल ने इसके साथ ही अदालत से इसको लेकर मानदंड तय करने का आग्रह भी किया कि लोगों को सुप्रीम कोर्ट का रुख कब करना चाहिए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सोरेन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चाहती है कि कोई भी विपक्षी सीएम अपने पद पर बना ना रहे और हर जगह केवल डबल इंजन सरकार हो।
सिब्बल ने कहा कि हमें अदालत द्वारा यह बताया जाना चाहिए कि हमें किस मामले में शीर्ष अदालत में लेकर आना चाहिए और किस मामले में नहीं। हमें नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट हमारी याचिका सुनेगा या नहीं, लेकिन हम इतिहास के बारे में जानते हैं। उन्होंने दलील दी कि अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकार भी देता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई मामलों पर विचार किया गया है और अनुच्छेद के तहत राहत प्रदान की गयी है। संविधान का अनुच्छेद 32 प्रत्येक नागरिक को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किये जाने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक राहत लेने का अधिकार देता है। सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत को एक ऐसी प्रणाली या नीति बनानी चाहिए, जिसके तहत लोगों को पता हो कि उसके पास कब जाना है और कब नहीं।