नयी दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिका द्वारा जारी संशोधित इंडिया-यूएस ट्रेड फ्रेमवर्क फैक्टशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिकी दस्तावेज में किये गये बदलाव दोनों देशों के बीच बनी साझा समझ के अनुरूप हैं। उन्होंने बताया कि 7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने पारस्परिक तथा परस्पर लाभकारी व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया था। यही संयुक्त वक्तव्य इस पूरी प्रक्रिया का आधार है और दोनों पक्षों की आपसी सहमति को दर्शाता है। प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिकी फैक्टशीट में जो संशोधन किये गये हैं, वे उसी संयुक्त वक्तव्य में शामिल बिंदुओं और सहमतियों को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने दोहराया कि दोनों देश अब इस तय ढांचे को लागू करने और अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।
भारत-अमेरिकी ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने के बाद से टैरिफ से जुड़ी लगातार नयी खबरें सामने आ रही हैं। पहले अमेरिकी दालों के भारत में टैक्स फ्री होने की जानकारी सामने आयी और अब यूएसए में टेक्सटाइल पर जीरो टैरिफ की सभावना जतायी गयी है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत बांग्लादेश की तरह धागा और कपास से जुड़े (टेक्स्टाइल) व्यापारिक लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि अंतिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारतीय कपड़ा निर्यातकों को अमेरिकी कपास से बने कपड़ों के लिए अमेरिकी बाजार में जीरो ड्यूटी की सुविधा मिल सकती है। इससे भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यातकों को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। और वे बांग्लादेश जैसे करीबी प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने के साथ ही अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।
बांग्लादेश के साथ बराबरी, नुकसान नहीं
केंद्रीय मंत्री ने बांग्लादेश को बेहतर शर्तों वाली डील मिलने के दावों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन दावों को खारिज किया और कहा कि भारत को भी समान लाभ मिलेगा। गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा, उन्होंने संसद में एक और झूठ फैलाया कि व्यापार समझौते से बांग्लादेश को भारत से ज्यादा फायदा मिला है। इस प्रावधान को समझाते हुए गोयल ने कहा, जैसे बांग्लादेश को यह सुविधा है कि अगर कच्चा माल अमेरिका से खरीदा जाये और उसे प्रोसेस कर कपड़ा बनाकर निर्यात किया जाये तो उस पर जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ लगेगा। भारत को भी यही सुविधा मिलेगी और भारत को भी इसका लाभ मिलेगा।
गारमेंट इंडस्ट्री को राहत
अगर भारत-अमेरिका के बीच उम्मीद के तहत समझौता होता है तो यह भारत की श्रम-प्रधान टेक्सटाइन और परिधान इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत होगी। अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील के बीच इस सेक्टर को बहुत दबाव का सामना करना पड़ा था और भारत के मार्केट शेयर खोने को लेकर भी सवाल उठे। बता दें कि यूनाइटेड स्टेट्स टेक्स्टाइल और परिधानों के लिए भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। अमेरिकी कपास से बने परिधानों पर जीरो ड्यूटी की सुविधा मिलने से भारतीय निर्यातकों को शिपमेंट बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में रोजगार सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि ट्रेड डील से होने वाले फायदे सिर्फ टेक्सटाइल तक सीमित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते कृषि और मरीन सेक्टरों से निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे निर्यात में संभावित रूप से 10 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है और किसानों की आय में इजाफा हो सकता है।



