रांची। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बुधवार को ट्विटर पर चौपाल लगाकर लोगों के सवालों के जवाब दिये। जल-जंगल-जमीन की परंपरागत पार्टी की तकनीकी शुरुआत शानदार रही। हेमंत ने ट्विटर इंडिया के प्लेटफॉर्म पर चौपाल लगायी और तीर-धनुष से आगे बढ़ कर हाइटेक तरीके को अपनाया। कार्यकर्ताओं के साथ ही झारखंड की जनता से मुखातिब होते हुए हेमंत ने काफी देर तक सवालों के जवाब दिये।
हेमंत ने अपनी पार्टी के विधायक कुणाल षाडंगी की ओर से पूछे गये सवालों के सधे जवाब दिये। दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया। रांची के सोहराय भवन पहुंचे लोगों ने उनसे लाइव सवाल पूछे। एक युवा ने उनसे लालू प्रसाद से गठबंधन पर भी सवाल दागा। हेमंत से पूछा गया कि आखिर किन परिस्थितियों में लालू के साथ समझौता किया जा रहा है, जबकि लालू ने कहा था कि उनकी लाश पर झारखंड बनेगा। हेमंत सोरेन ने कहा कि जब लंबा सफर तय करना हो या ऊंची छलांग लगानी हो, तो कभी-कभी कंकड़-पत्थर को भी सीढ़ी बनाना पड़ता है। अभी जो परिस्थिति है, उसे देखते हुए समान विचारधारा वाले दलों जोड़ने की जरूरत है, क्योंकि यह वक्त की मांग है।
85 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने का प्रावधान
कार्यक्रम में रोजगार, पलायन और स्थानीयता से जुड़े सबसे अधिक सवाल पूछे गये। हेमंत ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर स्थानीयता और नियोजन नीति को फिर से परिभाषित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि रोजगार बढ़ाने में निजी कंपनियों का भी योगदान है। वह इसका विरोध नहीं करते है। यहां उद्योगपति अपने उद्योग लगायें, लेकिन राज्य के विकास में सहयोगी बनें, न कि यहां के संसाधनों का दोहन करें। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कंपनियां जब यहां के संसाधनों का उपयोग करती हैं, तो उन्हें रोजगार में भी 85 प्रतिशत स्थान स्थानीय को देना होगा। उनकी सरकार बनने पर इसके लिए नीति बनायी जायेगी।
बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है : राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा पर हेमंत सोरेन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण हो रहा है। बीमा कंपनियां न तो स्वास्थ्य में सुधार ला सकती हैं और न ही ऐसा किया है। आज तक बीमा कंपनी ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया है। यही हाल आयुष्मान भारत का होगा। सरकार को चाहिए कि वर्तमान संस्थाओं में सुधार करे। ज्यादा से ज्यादा डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल कर्मियों की भर्ती के साथ मेडिकल कॉलेजों और संस्थाओं को बढ़ाने की जरूरत है।
निगेटिव बोलने पर होती है दिक्कत
राज्य की परिवहन व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं के सवाल पर हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रदेश के बारे में निगेटिव बोलने पर तकलीफ होती है। कई अन्य शहरों की अपेक्षा यहां मूलभूत सुविधा बहुत कम है। लेकिन सरकार द्वारा जितनी भी सुविधाएं दी गयी हैं, उनका उपयोग लोग सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। लोगों की मानसिकता को भी बदलने की जरूरत है। उन्होंने चार्टर्ड साइकिल का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार द्वारा अच्छी पहल की गयी, लेकिन लोग किस तरह से इसका दुरुपोग कर रहे हैं, यह देखने लायक है।
जनजातीय समुदाय को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है : जनजातीय मुद्दों पर राष्टय स्तर पर नेतृत्व करने के सवाल पर हेमंत सोरेन ने कहा कि मौका मिला तो इस पर काम करेंगे। शिबू सोरेन द्वारा बहुत सा आंदोलन किया गया है। वह अभी उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां उन्हें थोड़ी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द देश के सभी जनजातीय समुदाय के लोगों को उनके हक-अधिकार के लिए एक प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास करेंगे।
सेना के काम में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए : सेना की कार्रवाई पर पूछे गये सवाल पर हेमंत सोरेन ने कहा कि सेना के काम में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, यह सेना को अच्छी तरह से पता है।