New Delhi : भारत में COVID-19 संक्रमण न फैले इसके लिए लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट और सरकारी कंपनियों के कर्मचारी घरों से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय बैंकिंग और फाइनेंशल सर्विसेज के सामने साइबर सिक्यॉरिटी प्रोटोकॉल बनाए रखने से जुड़ी चुनौती है क्योंकि साइबर क्रिमिनल्स को इसका फायदा मिल सकता है। बैंकिग और फाइनेंशल कंपनियों पर बाहरी अटैक का खतरा बढ़ा है, साथ ही कस्टमर के तौर पर आपको भी अलर्ट रहना चाहिए। साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा स्थिति में साइबर क्राइम करने वाले अटैकर्स पहले से ज्यादा ऐक्टिव हो गए हैं और इसे एक मौके की तरह देख रहे हैं। अटैकर्स बैंक कर्मचारियों के नेटवर्क के अलावा मैलवेयर अटैक्स डिजिटल चैनल्स की मदद से कर रहे हैं। वहीं स्कैम मेसेजेस भेजकर यूजर्स को फ्रॉड में फंसाने और सिक्यॉर नेटवर्क्स का रिमोट ऐक्सेस पाने की कोशिश भी अटैकर्स की ओर से की जा रही है।
साइबर सिक्यॉरिटी फर्म क्रॉल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर तरुण भाटिया ने कहा, ‘ज्यादातर बैंक जहां लॉकडाउन के वक्त भी अपने नेटवर्क्स पर काम कर रहे हैं, ऐसे प्रोटोकॉल्स को भारत में या ग्लोबली इतने बड़े स्तर पर कभी टेस्ट नहीं किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘इन प्रोटोकॉल्स को डिवेलप करते वक्त रिमोटली अपने घर से काम कर रहे लोगों के अलावा कोई और भी इसका हिस्सा बनने और नेटवर्क क्रैक करने की कोशिश कर सकता है।’