रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने आठ खनन लीज धारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को लेकर सुनवाई करते हुए कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने प्रधान सचिव को चार सप्ताह के भीतर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के पत्र पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

दरअसल, एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने दो सितंबर 2025 को पत्र संख्या 582 के माध्यम से आठ खनन लीज धारकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) की अनुमति मांगी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन लीज धारकों ने जिला खनन पदाधिकारी, पाकुड़ के प्रमाणपत्र को जालसाजी करके और अधिकारियों की मिलीभगत से पर्यावरण स्वीकृति (Environment Clearance) हासिल की।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित सभी आठ खनन लीज पहले ही रद्द (cancel) की जा चुकी हैं। हालांकि, प्रारंभिक जांच की अनुमति अब तक कैबिनेट सचिवालय एवं सतर्कता विभाग से नहीं मिल पाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई इसी अनुमति पर निर्भर है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर देरी उचित नहीं है। अदालत ने याचिका को निष्पादित करते हुए समय सीमा तय कर दी है।

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