रांची। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और बिहार में सियासी बदलाव के कयासों ने झारखंड की राजनीति में भी गर्माहट ला दी है। राज्य में सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दोनों दलों ने इसे भाजपा की साजिश करार दिया और नीतीश कुमार के साथ धोखा होने का आरोप लगाया।

झामुमो ने बताया ‘बिहार के मतदाताओं से धोखा’

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि बिहार से नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजकर भाजपा अपनी विचारधारा वाले नेता के हाथों बिहार की कमान सौंपने जा रही है। उन्होंने इसे बिहार के करोड़ों मतदाताओं के साथ धोखा बताया, जिन्होंने नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट किया था। पांडेय ने कहा, “जिस नीतीश कुमार के चेहरे पर बिहार में विधानसभा चुनाव हुए और जनमत मिला था, उन्हें कुछ महीनों में ही राजनीतिक रूप से समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की नीति अपनाकर लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जा रही है। पांडेय ने कहा कि नीतीश कुमार पर बहुत बड़ा दबाव है, इसलिए वह राज्यसभा जाने को राजी हुए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का स्थान कोई नहीं ले पाएगा और आने वाले दिनों में बिहार में एनडीए कमजोर होगा।

कांग्रेस बोली- ‘नीतीश बनेंगे दूसरे शिंदे’

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता कमल ठाकुर ने कहा कि यह तो पहले से तय था कि नीतीश कुमार के साथ खेला होने वाला है। उन्होंने कहा, “भाजपा नीतीश कुमार को देश का दूसरा शिंदे बनाना चाहती थी। भाजपा ने आज तक अपने किसी राजनीतिक पार्टनर को चैन से नहीं रहने दिया है। जब-जब मौका मिला है, भाजपा सुरसा की भांति अपने ही सहयोगी दलों को निगलती रही है।”

कमल ठाकुर ने कहा कि नीतीश कुमार ने जो बोया है, वही काट रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अब नीतीश कुमार और जदयू का नामोनिशान बिहार से खत्म करने वाली है। उन्होंने कहा कि जदयू अब कुछ महीने की मेहमान है, क्योंकि उसके कार्यकर्ता संघ, मंडल और कमंडल में बंटे हुए हैं।

भाजपा का पलटवार

झामुमो और कांग्रेस के बयानों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने पर बयान देने की जगह झारखंड मुक्ति मोर्चा को अपनी चिंता करनी चाहिए। पाठक ने कहा, “उन्हें यह बताना चाहिए कि बिहार में उनके साथ जो अन्याय राजद और कांग्रेस ने किया है, खाली डिब्बा उन्हें वापस भेज दिया, उस पर समीक्षा कब करेंगे और राजद को मंत्रिमंडल से कब हटाएंगे।”

बिहार में सियासी बदलाव के बीच झारखंड के राजनीतिक दलों की ये प्रतिक्रियाएं आने वाले दिनों में दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकती हैं।

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