पटना: राजद प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार पर जांच का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। एक के बाद एक उनका कोई न कोई परिवार का सदस्य जांच की जद में आता जा रहा है। इसी क्रम में आयकर विभाग ने पटना एयरपोर्ट के पास केंद्रीय विद्यालय के सामने एक बड़े भवन को जब्त कर लिया है। इस भवन पर आयकर विभाग की तरफ से बेनामी संपत्ति एक्ट मामले में कार्रवाई करते हुए पर्चा चिपका दिया गया है।
इस पर आयकर विभाग ने जमीन से संबंधित पूरा ब्योरा दर्ज किया है। विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार, यह जमीन फेयरग्रो प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। जांच में यह पता चला है कि इस कंपनी में लालू प्रसाद के बड़े बेटे और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव निदेशक के पद पर हैं। इस कंपनी में चार से पांच निदेशक हैं, जिसमें इनके अलावा उनके अन्य करीबी और परिचित शामिल हैं।
फिलहाल इस संपत्ति को शुरुआती तौर पर जब्त किया गया है। आयकर की कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद इसे अंतिम रूप से जब्त कर लिया जायेगा। यह मकान रैयती जमीन पर बना हुआ है, जिसका रकवा 7105 वर्ग फीट है। यह करीब सवा पांच कट्ठा से थोड़ी ज्यादा जमीन है। इसमें तीन-चार प्लॉट को मिलाकर एक साथ सम्मिलित किया गया है। यह पांच राइडिंग रोड शेखपुरा में पड़ता है।
इसका थाना क्षेत्र शास्त्री नगर है और वार्ड संख्या-33 के सर्किल नंबर 247 का होल्डिंग नंबर 666/129 है। पटना जिले के पॉश इलाके में मौजूद इस जमीन का बुक मूल्य तीन करोड़ 67 लाख है। बाजार मूल्य इससे कहीं ज्यादा है। अब इस जमीन को जब्त करने के बाद बेनामी संपत्ति एक्ट के तहत मुकदमा चलेगा।
बता दें कि इससे पहले आयकर विभाग ने लालू प्रसाद एवं उनके परिजनों के नाम बेली रोड पर निर्माणाधीन बिहार के सबसे बड़े मॉल की जमीन के साथ-साथ मां मरिछिया देवी कांपलेक्स एवं दानापुर में कई अन्य भूखंड को जब्त कर लिया है। इससे पहले आयकर विभाग बेनामी संपत्ति के रूप में लालू प्रसाद की बेटी एवं राज्यसभा सदस्य मीसा भारती एवं उनके पति शैलेश कुमार की दिल्ली स्थित कई संपत्तियां जब्त कर चुका है।
रांची में हाइकोर्ट ने की लालू प्रसाद की याचिका स्वीकृत: चारा घोटाला में सजायाफ्ता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की अपील पर सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई। हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की कोर्ट ने मामले में लालू प्रसाद की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया। साथ ही सीबीआइ को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले में सीबीआइ कोर्ट से रिकार्ड(एलसीआर) मांगी है।
लालू को 14 साल की सजा सुनायी गयी है: बता दें कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी कांड संख्या आरसी 38ए/96 में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की कोर्ट ने लालू प्रसाद को सजा सुनायी है। कोर्ट ने लालू प्रसाद को आइपीसी एवं पीसी एक्ट में सात- सात साल यानी कुल 14 साल की सजा सुनायी है। इसे लालू ने हाइकोर्ट में चुनौती दी है।