रांची। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआइ एवं शशिनाथ झा के परिवार वालों की अपील खारिज होने के बाद झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन अपने अधिवक्ता सह राज्यसभा सांसद संजीव कुमार के साथ मीडिया के सामने शुक्रवार को आये। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कहा कि उन्हें साजिश कर इस मामले में फंसाया गया है। किसने फंसाया है के सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली। साथ ही कहा कि यह जांच का विषय है। राज्यसभा सांसद संजीव कुमार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया है कि सीबीआइ द्वारा प्लाट की गयी लाश शशिनाथ झा की नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने शिबू सोरेन को बरी कर दिया है, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हाइकोर्ट ने भी कहा था कि उक्त लाश शशिनाथ झा की नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अब मुहर लगा दी है। इस केस में शिबू सोरेन को कई साल जेल में रहना पड़ा, उनका पूरा परिवार तहस-नहस हो गया था। जांच को भटकाने के मामले में सीबीआइ अगर दोषी साबित होती है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए। सीबीआइ ने निर्दोष को फंसाने का काम किया है। सांसद संजीव ने कहा कि अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। अलीम के घर वालों एवं गांववालों ने दावा किया था कि वह लाश अलीम की थी। सीबीआइ ने अलीम की लाश को शशिनाथ झा की लाश बताकर उनके खिलाफ साजिश की है। ऐसे में शशिनाथ झा के परिवार के साथ-साथ अलीम के घर वालों को भी न्याय मिलना चाहिए। एक सवाल के जवाब में सांसद संजीव कुमार ने कहा कि शशिनाथ झा के परिवार से शिबू सोरेन का किसी तरह का मतभेद नहीं है।

क्या था मामला: 22 मई 1994 को शशिनाथ झा को कथित रूप से अगवा कर उनकी हत्या कर दी गयी थी। उस समय शशिनाथ शिबू सोरेन के पीए थे। बताया जाता है कि 1993 में नरसिंहा राव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट करने के लिए झामुमो के चार नेताओं को रिश्वत देने की जानकारी शशिनाथ झा को हो गयी थी। शशिनाथ हत्याकांड मामले में दिल्ली की निचली अदालत ने शिबू सोरेन को 28 नवंबर 2006 को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी थी। हालांकि 23 अगस्त 2007 को दिल्ली हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया और शिबू सोरेन को इस मामले से बरी कर दिया। इस फैसले को सीबीआइ और शशिनाथ झा के परिवार वालों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों की अपील खारिज कर शिबू सोरेन को बरी करने के हाइकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।

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