कोरोना के खिलाफ जंग का निर्णायक दौर शुरू हो गया है और देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। संकट के इस दौर में केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक अपने-अपने तरीके से लोगों को राहत पहुंचाने के काम में लगी है। जहां तक झारखंड का सवाल है, तो यहां की हेमंत सोरेन सरकार संकट शुरू होने के बाद से ही लगातार तीन मोर्चों पर जूझ रही है। पहला मोर्चा सीमित संसाधनों में कोरोना महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकना है, तो दूसरा मोर्चा संक्रमित लोगों के उपचार का है। तीसरा मोर्चा लॉकडाउन के कारण लोगों की मुश्किलों को दूर करना और राज्य के हरेक व्यक्ति को भर पेट भोजन सुनिश्चित करना है। देशव्यापी लॉकडाउन के 22 दिन बाद यदि यह कहा जाये कि हेमंत सोरेन सरकार इन तीनों मोर्चों पर लगातार सफल होती दिख रही है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। झारखंड सरकार ने कोरोना संकट के दौरान जो कुछ किया है, उससे साफ जाहिर होता है कि राज्य के लोगों को इसने बहुत बड़ी चिंता, यानी पेट भरने की चिंता से मुक्त कर दिया है। हेमंत सोरेन सरकार द्वारा कोरोना संकट के दौरान उठाये गये कदमों और राज्य की सवा तीन करोड़ आबादी पर इन कदमों के असर का विश्लेषण करती आजाद सिपाही ब्यूरो की खास रिपोर्ट।
बात 14 अप्रैल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना संकट के खिलाफ जारी जंग के निर्णायक दौर के तहत लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने का एलान कर चुके थे। तीसरे पहर जब मुंबई के बांद्रा इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के एकत्र होने और लाठी चार्ज की खबर आयी, तो करीब दो हजार किलोमीटर दूर रांची के गाड़ीखाना इलाके से एक व्यक्ति ने फोन किया। उसने मुंबई की घटना की सूचना देते हुए कहा कि झारखंड में कहीं ऐसे हालात नहीं हैं और होंगे भी नहीं, क्योंकि यहां जो प्रवासी मजदूर या अन्य लोग हैं, सभी को भरपेट खाना या जरूरी सामान मिल रहे हैं। उस व्यक्ति ने बताया कि उसके पड़ोस में हरियाणा के दो परिवार रहते हैं, जो यहां सेल्समैन हैं। लॉकडाउन के कारण उनकी आमदनी बंद है, लेकिन ये परिवार जरा भी परेशान नहीं है, क्योंकि उसे झारखंड सरकार की ओर से हरसंभव मदद मिल रही है।
यह झारखंड की हकीकत है। लॉकडाउन के दौरान हालांकि केंद्र और दूसरे राज्यों की सरकारें अपने यहां लोगों को राहत पहुंचाने में लगी हुई हैं और राहत पहुंचा भी रही हैं, लेकिन झारखंड सरकार इस दिशा में जितना काम कर रही है, उसकी चौतरफा तारीफ हो रही है।
झारखंड सरकार का संकल्प है कि कोरोना संक्रमण काल में झारखंड में कोई भूखा नहीं रहेगा। इसके लिए राज्य में 377 मुख्यमंत्री दाल-भात केंद्र चलाये जा रहे हैं। इनमें 11 केंद्र रात को भी चल रहे हैं। इसके अलावा 498 विशेष दाल-भात केंद्र संचालित किये जा रहे हैं और पुलिस थानों में 342 अतिरिक्त दाल-भात केंद्र चल रहे हैं। पंचायत स्तर पर 4562 पंचायतों में मुख्यमंत्री दीदी किचेन से भी जरूरतमंदों और असहायों को भोजन दिया जा रहा है। यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है। इन केंद्रों से हर दिन करीब आठ लाख लोग भर पेट भोजन कर रहे हैं। यह तो हुई मुफ्त भोजन देने की बात। इसके अतिरिक्त झारखंड सरकार ने अगले तीन महीने के लिए राशन भी देने का एलान किया है। इसके तहत पीएचएच कार्डधारी को 10 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति सदस्य एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से दिया जा रहा है। मई में खाद्य सुरक्षा अधिनियम से आच्छादित प्रत्येक पीएचएच कार्डधारी को 10 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति सदस्य मुफ्त दिया जायेगा। जून में ऐसे कार्डधारियों को माह में पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्रति सदस्य एक रुपये प्रति किलोग्राम और इतना ही खाद्यान्न मुफ्त दिया जायेगा।
इसके अतिरिक्त अंत्योदय कार्डधारियों को अप्रैल में एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 70 किलोग्राम खाद्यान्न दिया गया है, जबकि मई में 10 किलोग्राम प्रति सदस्य खाद्यान्न मुफ्त दिया जायेगा और जून में प्रति कार्ड 35 किलोग्राम खाद्यान्न एक रुपये प्रति किलोग्राम और प्रति सदस्य पांच किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त दिया जायेगा।
झारखंड सरकार प्रति राशन कार्ड डेढ़ लीटर केरोसिन भी दे रही है, जिसकी सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है। लाभुकों को राशन का वितरण फिक्स्ड ओटीपी के आधार पर दिया जा रहा है। यह सुविधा 57 लाख लोगों के लिए उपलब्ध करायी गयी है।
झारखंड सरकार ने केवल खाद्यान्न ही नहीं दिया है, बल्कि उसे पकाने के लिए रसोई गैस भी दे रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन लेनेवालों को अगले तीन महीने तक मुफ्त सिलिंडर दिया जायेगा। यह रकम लाभुकों के बैंक खाते में भेजी जायेगी। मुख्यमंत्री कैंटीन से आकस्मिक राहत पैकेट द्वारा दो किलोग्राम चूड़ा, आधा किलोग्राम गुड़ और आधा किलोग्राम चना भी दिया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे जरूरतमंद, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और उन्होंने आवेदन दिया है और योग्यता भी रखते हैं, उन्हें प्रति परिवार 10 किलोग्राम खाद्यान्न एक रुपये प्रति किलोग्राम दिया जा रहा है।
इसके बाद हेमंत सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को दो सौ करोड़ रुपये दिये हैं, ताकि कोरोना के खिलाफ जंग को प्रभावी तरीके से लड़ा जा सके। प्रत्येक जिले को 50-50 लाख रुपये दिये गये हैं। इसके अलावा प्रत्येक मुखिया और नगर निकायों के प्रत्येक वार्ड सदस्य को 10-10 हजार रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी है, जिससे जरूरतमंदों को सहायता दी जा सके। राज्य सरकार ने अप्रैल माह तक सभी तरह की पेंशन की रकम का भुगतान भी कर दिया है।
इतना सब कुछ करने का मकसद केवल यही है कि कोरोना के खिलाफ जारी जंग के दौरान झारखंड के लोगों को पेट भरने की चिंता नहीं रहे और वे पूरी तरह इस महामारी को पराजित करने में जुट जायें। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दे रही है। रांची और जमशेदपुर के बाद अब धनबाद में कोरोना संक्रमण के सैंपल की जांच की सुविधा शुरू कर दी गयी है। जांच के लिए जरूरी किट और अन्य सामान भी अब पर्याप्त मात्रा में आ गये हैं। क्वारेंटाइन केंद्रों और आइसोलेशन वार्ड के साथ आइसीयू और वेंटिलेटर की भी पक्की व्यवस्था कर ली गयी है।
अब यह झारखंड के लोगों का कर्तव्य बन जाता है कि वे कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी भूमिका अदा करें। लॉकडाउन के कारण घर में रहें और सरकार के निर्देशों का पालन करें। झारखंड की हेमंत सरकार अपना कर्तव्य बखूबी निभा रही है, अब जरूरत लोगों को ऐसा करने की है, ताकि झारखंड को इस वैश्विक महामारी से बचाया जा सके।