- मांग रही थी 6000 रुपये, 2200 रुपये मिलने पर भी दो दिन रखा
दुर्गेश पांडेय
चौपारण। मात्र 6000 रुपये के लिए चौपारण के करमा उपस्वास्थ्य केंद्र की एएनएम मीना देवी पर जच्चा और बच्चा को दो दिनों तक बंधक बनाये रखने का आरोप लगा है। प्रखंड के केवलिया निवासी उमेश भुइयां ने करमा पंचायत मुखिया को लिखित आवेदन देकर यह आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एएनएम मीना देवी ने हमारी पुत्री और उसके नवजात बच्चे को बंधक बना लिया है। अपने आवेदन मे कहा कि 11 अप्रैल को 11 बजे रात मेरी पुत्री बसंती देवी को प्रसव पीड़ा हुई। उसे मैं नजदीकी उपस्वास्थ्य केंद्र करमा लेकर गया। लगभाग 4 बजे प्रसव हुआ। प्रसव के बाद जब उन्होंने घर जाने के लिए छुट्टी मांगी। तब एएनएम मीना देवी ने मुझसे 6000 रुपए की मांग की। मैंने किसी तरह से 22 सौ रुपये मीना देवी को दिये। रुपये देने के बाद भी मीना देवी ने मेरी पुत्री को छुट्टी नहीं दी। दोनों जच्चा और बच्चा को बंधक की तरह रखा, छुट्टी नहीं दी। पैसे मांगने के सबूत के तौर पर उमेश ने मुखिया को ऑडियो रिकार्डिंग भी दी है, जिसे सुनने पर साफ पता चलता है कि नर्स ने उनसे यह कहकर पैसे मांगे कि बहुत मुश्किल से प्रसव कराया गया है। सरकारी होने का हवाला देने पर कहा गया कि सरकारी होने से क्या होता है, काफी मेहनत की है हमने।
डॉक्टर और नर्स के दबाव में मांगे थे पैसे: मीना देवी
इस मामले में पूछे जाने पर नर्स मीना देवी ने कहा कि 6000 मांगने का आरोप सही है, लेकिन यह रुपया चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर धीरज कुमार एवं एएनएम पूजा कुमारी रजक के दबाव पर मांगा गया था। प्रभारी हमेशा दबाव बनाते हैं कि प्रत्येक प्रसव पर अतिरिक्त रकम ली जाये। इनका सहयोग एएनएम पूजा रजक करती हैं।
एएनएम ने उपयुक्त को दिया आवेदन
इधर, एएनएम मीना देवी ने पीड़ित हजारीबाग के डीसी को आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि प्रसव के क्रम में डॉ धीरज कुमार एवं एएनएम पूजा कुमारी रजक के उपस्थित थें। पैसे की मांग भी चिकित्सा प्रभारी डॉ धीरज कुमार ने ही की। पैसे नही दिये जाने पर जच्चा और बच्चा को छुट्टी नहीं देने को बोला गया। इसकी लिखित सूचना विभागीय पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी को भी दी गयी है। दूसरी ओर पंचायत मुखिया एवं प्रखंड मुखिया संघ अध्यक्ष ने भी स्थानीय विधायक से मामले की जांच कर दोषी एएनएम और चिकित्सक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।