अजय शर्मा
रांची। कोरोना महामारी से जहां पूरा विश्व परेशान है, वहीं भारत में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस महामारी से बेहतर जंग लड़ रहे हैं। कम संसाधन वाले छोटे से राज्य में सरकार ने कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए जो कदम उठाये हैं, अब उसकी प्रशंसा पूरे देश में हो रही है। यही वजह है कि इस राज्य में कोरोना के संक्रमण का फैलाव उस स्तर पर नहीं हुआ, जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी।
दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक सर्वेक्षण किया गया। इसमें कोरोना के खिलाफ जंग लड़नेवाले देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों का चयन किया जाना था। इस सर्वेक्षण का जो परिणाम आया, उसमें सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सर्वश्रेष्ठ माना गया। सर्वेक्षण में कहा गया कि ये सात मुख्यमंत्री कोरोना के खिलाफ बेहतर जंग की अगुवाई कर रहे हैं। सर्वेक्षण के अनुसार सात सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों में झारखंड के हेमंत सोरेन, ओड़िशा के सीएम नवीन पटनायक, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, महाराष्टÑ के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन और पुड्डुचेरी के सीएम वी नारायणसामी को स्थान दिया गया। इस सूची में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी स्थान दिया गया था। हालांकि पंजाब, महाराष्ट्र और केरल में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद वहां की सरकारों द्वारा इसकी रोकथाम के लिए उठाये गये कदमों की चारों तरफ तारीफ हो रही है। उद्धव ठाकरे की तारीफ इसलिए की गयी है, क्योंकि वहां की पुलिस ने छह मार्च को मुंबई में आयोजित होनेवाले तबलीगी जमात के जलसे को अनुमति नहीं दी थी।
सर्वेक्षण में हेमंत सोरेन की तारीफ इसलिए की गयी, क्योंकि उन्होंने कोरोना खतरे की आहट पहले ही महसूस कर ली और सीमित संसाधन में ही राज्य की मशीनरी को इससे लड़ने के लिए तैयार कर लिया। उन्होंने सबसे पहले राज्य के तमाम शिक्षण संस्थानों को 14 अप्रैल तक के लिए बंद कर दिया, जबकि दूसरे राज्य 31 मार्च तक के लिए इन्हें बंद करने का एलान कर चुके थे। सीएम ने संक्रमण नहीं होने के बावजूद झारखंड में 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। आइसोलेशन और क्वारेंटाइन सेंटर बनवाया। झारखंड में मास्क और किट की कमी है। इसको दूर करने की दिशा में सीएम हेमंत ने खुद पहल की। हेमंत की पुलिस सरकार के आदेश का पालन करवाने के लिए सड़क पर है। लॉकडाउन से ही इस जंग से लड़ा जा सकता है। लिहाजा झारखंड पुलिस ने भी सरकार का पूरा साथ दिया। यही वजह है कि दो मामलों को छोड़ दें, तो यहां कोरोना का फैलाव सरकारी व्यवस्था के कारण नहीं हो पाया।