- 10 मिनट की बारिश और हिंदपीढ़ी नाला रोड मुहल्ला नाले में तब्दील
- लॉकडाउन का कैसे हो अनुपालन, जब घरों में घुस रही सड़क और नाले की गंदगी
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। गुरुवार को हुई 10 मिनट की बारिश ने हिंदपीढ़ी में नगर निगम के कार्यों की पोल खोल दी है। थोड़ी ही देर की बारिश के यहां का नाला रोड मुहल्ला सचमुच के नाले में तब्दील हो गया। नाले की गंदगी सड़कों पर बहने लगा। कई घरों में भी गंदगी अंदर चली गयी। कई घर सड़क के पानी में डूब गये। आलम यह था कि कोरोना से जंग लड़ रहे मुहल्ले के लोगों के समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी कि अब वे लॉकडाउन का पालन करें या घर से नाले की गंदगी को बाहर निकालें। घर से नाले का पानी बाहर फेंकते लोग बस रांची नगर निगम को कोसते नजर आये।
बारिश ने बिगाड़ी हिंदपीढ़ी नाला रोड की सूरत
जल निकासी का प्रबंध न होने और जाम नालियोंं के कारण जहां नाला रोड तालाब सदृश्य नजर आने लगा, वहीं मुहल्ले के कई क्षेत्रों में जल भराव तथा नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहते हुए लोगों के घरों में भी प्रवेश कर गया। 10 मिनट की बारिश से पूरे मुहल्ले की स्थिति नारकीय हो गयी। जगह-जगह नालियों का कचरा ही नजर आया। हर साल बारिश से पहले शहर में जल निकासी की व्यवस्था और जाम नालियों की साफ-सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन अभी तक वृह्द कार्ययोजना बना जल निकासी का पुख्ता प्रबंध नहीं करने से यह समस्या हर साल पहली बारिश में सामने आती है। लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि राजधानी रांची का हिंदपीढ़ी मुहल्ला राज्य में कोरोना का हाट स्पाट बना हुआ है। सबसे अधिक 32 कोरोना संकम्रित यहां मिले हैं। बावजूद इसके नगर निगम यहां सफाई कार्यों में लापरवाही बरत रहा है। जो निगमकर्मी या आ भी रहे हैं, वे महज सेनिटाइजेशन कर चले जाते हैं। साफ-सफाई पर खास ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण मुहल्ले में कई जगहों पर कूड़े-कचरे का अंबार लगा है। गुरुवार को हुई बारिश के बाद यही कचरा सड़क और नाले में बहने लगा। फिर पानी के साथ यह घरों में जाने लगा। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का स्पष्ट निर्देश है कि कोरना संकम्रित इलाकों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाये।
कोरोना की जंग में सहयोग करना चाहते हैं हिंदपीढ़ीवासी
हिंदपीढ़ी घनी आबादी वाला मुहल्ला है। महज तीन किमी के दायरे में यहां 60 हजार से ज्यादा की आबादी है। यहां कई संकरी और पतली गलिया हैं। यहां की लगभाग सभी नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। इनकी सफाई को लेकर कभी भी नगर निगम ने चिंता नहीं की। कोरोना से जंग के लिए मेयर आशा लकड़ा भले ही नगर विकास विभाग और सरकार पर राशि नहीं देने का आरोप लगा रही हों, परंतु सच्चाई तो यही है कि अब तक हिंदपीढ़ी में साफ-सफाई के नाम पर क्या हुआ, यह किसी से छुपा नहीं है। हिंदपीढ़ी के लोग भी अब कोरोना की इस जंग में आगे आ रहे हैं। यहां के प्रबुद्ध और समाजसेवी भी राहत कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं, ताकि लॉकडाउन की वजह से किसी गरीब को भूखे नहीं सोना पड़े। परंतु नगर निगम की इस तरह की बेरूखी और हिंदपीढ़ी को बदनाम करने के कुचक्र के बीच कोरोना के हमले से सबका उत्साह फीका पड़ जाता है। लोगों का कहना है कि इस समय जिस तरह की मुसीबत से वे घिरे हैं, इसमें प्रशासन और नगर निगम को इन छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना चाहिए, ताकि उनपर अतिरिक्त कार्यों का बोझ न बढ़े और वे भी इस संकट में सहयोग कर सकें।
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