आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। वैश्विक महामारी कोरोना के कहर को लेकर देशभर के लोग सहमे हुए हैं। झारखंड में कोरोना की जंग में सखी मंडल की दीदियां महायोद्धा बन कर उभर रही हैं। परिवार से दूर बिना पारिश्रमिक गरीबों की मदद के लिए दीदियां कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं। इन दीदियों का जज्बा देख कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोरोना से लड़ाई में सखी मंडल की दीदियों का बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना उत्साहजनक है। मुझे पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री दीदी किचेन के माध्यम से सरकार की पहुंच अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक होगी।
मुख्यमंत्री को जानकारी दी गयी कि राज्य की 4121 पंचायत में 2.20 लाख से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को हर दिन मुख्यमंत्री दीदी किचेन के जरिये खाना खिलाया जा रहा है। सखी मंडल की महिलाएं इस कार्य के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं ले रही हैं।
तमिलनाडु में फंसी 200 बहनों को मिली मदद
सीएम ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से तिरुपुर स्थित प्रीमियर निट्स अपैरल लिमिटेड कंपनी में कार्यरत झारखंड की युवतियों की मदद करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की इन 200 बहनों को तत्काल सहायता करें। उनसे काम लेने वाले उनके साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। इस मामले पर कार्रवाई के बाद दिल्ली के स्थानिक आयुक्त ने झारखंड सरकार को सूचित किया कि सभी लड़कियों को सुरक्षित रखा गया है। साथ ही उनके रहने और खाने की समुचित व्यवस्था भी कर दी गयी है।
मुसहर परिवारों को मिला खाद्यान्न
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद गढ़वा के मेराल प्रखंड में निवास करने वाले 10 मुसहर परिवार को 10 किलो चावल, चना, गुड़, चूड़ा उपलब्ध करा दिया गया। उपायुक्त गढ़वा ने बताया कि इसके पूर्व भी आकस्मिक कोष से प्रति परिवार 10 किलोग्राम राशन दिया गया है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त गढ़वा को ऐसे परिवारों को दीदी किचेन के माध्यम से उन्हें भी जोड़ने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिला प्रशासन सुनिश्चित करे कि प्रत्येक असहाय और वंचित व्यक्ति मुख्यमंत्री दीदी किचेन से जुड़ा हो। ध्यान रहे कोई भूखा न रहे। मुख्यमंत्री को बताया गया कि गढ़वा के मेराल में मुसहर परिवार भुखमरी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि लोगों ने उन्हें भिक्षा और भोजन देना बंद कर दिया है। राशन कार्ड नहीं हैं। आसपास में कोई दाल-भात केंद्र नहीं है। इसके बाद संज्ञान लेते हुए सीएम ने उक्त निर्देश डीसी को दिये।
सभी को महामारी से बचाने में जुटी सरकार
रांची। राज्य सरकार द्वारा झारखंड के सभी लोगों के लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि वे इस महामारी से बचे रहें और कोई भी व्यक्ति जो झारखंड का हो, वह राज्य के बाहर भी भूखे ना रहे। इसके साथ ही राज्य में अन्य राज्यों के वे लोग जो लॉकडाउन की वजह से अपने घर वापस नहीं जा सके, उनके लिए भी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। राज्यस्तरीय कोरोना नियंत्रण कक्ष में अब तक 5,937 शिकायतें प्राप्त हुर्इं, जिसमें 2,830 शिकायतों का समाधान किया जा जा चुका है। खाद्य आपूर्ति से संबंधित 1,629, चिकित्सा संबंधित 401, विधि व्यवस्था से संबंधित 273, झारखंड में फंसे 218 एवं 74 अन्य शिकायतों का समाधान कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अधिक से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। इस क्रम में अभी तक 1076 लोगों के सैंपल टेस्ट किया गया, जिसमें चार लोग पॉजिटिव मिले। अभी भी 160 लोगों का टेस्ट प्रतीक्षा में है। राज्य में 3,734 के क्वारेंटाइन सेंटर बनाये गये हैं, जिसमें 15,544 लोगों को क्वारेंटाइन किया जा रहा है। वहीं 1,33,435 लोग होम क्वारेंटाइन में रह रहे हैं। वहीं प्रवासी मजदूरों के लिए 418 राहत कैंपों में 74,593 मजदूरों को खाना खिलाया जा रहा है। विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से अब तक 4,923 जगहों पर 4,74,430 मजदूरों के फंसे होने की सूचना राज्य सरकार को प्राप्त हुई, जिनमें से 4552 जगहों पर 3,18,317 मजदूरों के लिए खाने एवं रहने का बंदोबस्त कर दिया गया है। साथ ही अब तक 13.53 लाख पेंशनधारकों को पेंशन की राशि दी गयी है।